रांची: झारखंड की राजधानी रांची में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के क्षेत्रीय कार्यालय पर पुलिस की छापेमारी के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। एयरपोर्ट थाने की पुलिस ने यह कार्रवाई पेयजल विभाग के एक कर्मी के साथ मारपीट के आरोप में की है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे भ्रष्टाचार के सबूतों को नष्ट करने की साजिश करार दिया है।
पुलिस रेड का कारण: मारपीट का आरोप
जानकारी के अनुसार, प्रतीक और शुभम नामक दो ED अधिकारियों पर पेयजल कर्मी संतोष कुमार से मारपीट का आरोप है।
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मामला: दो दिन पहले पेयजल विभाग से जुड़े एक मामले में ED ने संतोष कुमार से पूछताछ की थी।
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आरोप: कर्मी का दावा है कि पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने उसके साथ मारपीट की। इसी शिकायत के आधार पर एयरपोर्ट थाने में मामला दर्ज हुआ और पुलिस जांच के लिए ED दफ्तर पहुँची।
बीजेपी का पलटवार: “भ्रष्टाचार के साक्ष्य नष्ट करने की कोशिश”
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट कर सरकार को चेतावनी दी:
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साक्ष्यों पर खतरा: मरांडी ने आशंका जताई कि ED कार्यालय में मुख्यमंत्री और प्रशासन से जुड़े हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार के सबूत हैं, जिन्हें पुलिस कार्रवाई की आड़ में नष्ट किया जा सकता है।
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बंगाल से तुलना: उन्होंने कहा, “सीएम हेमंत कान खोलकर सुन लीजिए… झारखंड को बंगाल नहीं बनने देंगे। भ्रष्टाचार की सजा जरूर मिलेगी।”
संवैधानिक संस्था पर हमला: प्रतुल शाहदेव
बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने इस कार्रवाई को ‘बदले की राजनीति’ बताया। उन्होंने कहा:
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मुख्यमंत्री खुद ED के मामले में जेल जा चुके हैं और उनके कई करीबी रडार पर हैं।
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एक संवैधानिक संस्था पर इस तरह की रेड के दूरगामी परिणाम हेमंत सरकार को झेलने होंगे।
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यह जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने से रोकने का प्रयास है।
पृष्ठभूमि: ED बनाम सोरेन सरकार
झारखंड में केंद्रीय जांच एजेंसियों और राज्य सरकार के बीच टकराव का इतिहास पुराना है। इससे पहले भी ED अधिकारियों के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं और झामुमो कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन भी किए गए हैं। वर्तमान में कई बड़े जमीन घोटाले और अवैध खनन मामलों की जांच ED द्वारा की जा रही है।
