Jharkhand Police ने लिया बड़ा एक्शन; ईडी को भेजा समन, बुला लिया थाने

Ranchi: Jharkhand Police: झारखंड उच्च न्यायालय की तरफ से ईडी के अफसरों पर ‘कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं’ लेने के आदेश के एक हफ्ते के पश्चात झारखंड पुलिस एक बार फिर से एक्शन में है.

एससी एसटी मामले में Jharkhand Police ने संबंधित अधिकारियों को समन भेजा

झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की तरफ से अफसर के खिलाफ दर्ज कराए गए एससी एसटी मामले में Jharkhand Police ने संबंधित अधिकारियों को समन भेजा है. अधिकारियों को 21 मार्च की सुबह 11 बजे थाने में मौजूद रहने को कहा गया है. पूर्व सीएम हेमंत सोरेन ने अफसरों को प्रताड़ित करने एवं पूरे समुदाय को अपमानित करने का आरोप लगाया है.

अधिकारियों को समन भेजे जाने की जानकारी रखने वाले एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि दो-तीन दिन पूर्व रांची में गोंडा पुलिस थाने से समन भेजा गया है. पुलिस अधिकारी ने कहा कि जिन लोगों को समन भेजा गया है उसमें एडिशनल डायरेक्टर कपिल राज, असिस्टेंट डायरेक्टर देवव्रत झा समेत अमन पटेल एवं अनुपम कुमार सम्मिलित है.

इस मामले पर एसएसपी चंदन कुमार ने समन की पुष्टि की परंतु कोई भी ब्यौरा देने में असमर्थता जाहिर की.एसएसपी चंदन कुमार ने बताया, ‘हां, प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों को समन भेजा गया है परंतु मैं इस केस में ज्यादा ब्यौरा साझा नहीं कर सकता हूं. इस मामले में जांच अधिकारी ही ज्यादा कुछ बता सकते हैं.’

Jharkhand Police: ED ने 5 फरवरी को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था

इस मामले के जांच अधिकारी अजय कुमार सिंह से कोई संपर्क नहीं हो सका है. गोंडा पुलिस थाने के अधिकारी का कहना है कि वह इस मामले की जांच के लिए दिल्ली गए हैं. 4 मार्च को झारखंड उच्च न्यायालय ने इस केस में कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने को कहा था. पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तरफ से 31 जनवरी को दर्ज करवाए गए मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय ने 5 फरवरी को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था.

यह मामला उसी दिन दर्ज किया गया था जिस दिन पूर्व सीएम हेमंत सोरेन से अवैध लैंड डील मामले में उनके आवास पर पूछताछ की जा रही थी. इसी केस में गिरफ्तारी के पश्चात पूर्व सीएम जेल भी जा चुके थे. इसके साथ ही हेमंत सोरेन ने फिर में आरोप लगाया है कि प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें प्रताड़ित एवं पूरे समुदाय को बदनाम किया और दिल्ली स्थित उनके आवास पर छापेमारी की. पूर्व सीएम का कहना है कि ऐसा ईडी ने जानबूझकर किया क्योंकि ईडी अधिकारी गैर आदिवासी समुदाय से थे.

 

 

 

 

 

 

 

 

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