जयराम महतो के एक फैसले पर टिकी नजर, राज्यसभा चुनाव में बढ़ा सस्पेंस

रेडिसन ब्लू और BNR में बंद कमरे की राजनीति, कौन जीतेगा राज्यसभा का दंगल?

राज्यसभा चुनाव: BNR और रेडिसन ब्लू बने सियासी रणक्षेत्र, जयराम महतो के रुख पर टिकी सबकी नजर

रांची: झारखंड राज्यसभा चुनाव अब अंतिम दौर में पहुंच चुका है और राजधानी रांची के दो बड़े होटल इस राजनीतिक मुकाबले के केंद्र बन गए हैं। एक ओर जहां महागठबंधन ने अपने विधायकों को होटल बीएनआर में ठहराया है, वहीं एनडीए खेमे की रणनीति होटल रेडिसन ब्लू से संचालित हो रही है। दोनों पक्ष अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और चुनावी गणित साधने में जुटे हैं।

राज्यसभा की दो सीटों के लिए हो रहे इस मुकाबले ने राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है। बंद कमरों में लगातार बैठकों का दौर जारी है और हर दल जीत के लिए आखिरी रणनीति तैयार कर रहा है।

महागठबंधन ने दिखाया एकजुटता का दम

होटल बीएनआर में कांग्रेस, झामुमो, राजद और वाम दलों के विधायक ठहरे हुए हैं। राजद के वरिष्ठ नेता भोला यादव भी अपने विधायकों के साथ लगातार संपर्क में हैं। महागठबंधन के नेताओं का दावा है कि उनके पास जीत के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।

राज्य सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा है कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और दोनों सीटों पर जीत दर्ज करेगा। उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन को 56 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है।

मुख्यमंत्री आवास में रणनीतिक बैठक

राज्यसभा चुनाव से पहले महागठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक मुख्यमंत्री आवास में बुलाई गई है। बैठक में मतदान की रणनीति, विधायकों की एकजुटता और अंतिम राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा होने की संभावना है।

गठबंधन नेतृत्व किसी भी तरह की चूक से बचना चाहता है और इसी वजह से लगातार बैठकों का दौर जारी है।

जयराम महतो बने चुनावी समीकरण का केंद्र

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच जेएलकेएम विधायक जयराम महतो का रुख सबसे ज्यादा चर्चा में है। उन्होंने अभी तक खुलकर किसी पक्ष का समर्थन नहीं किया है, जिससे राजनीतिक उत्सुकता बढ़ गई है।

हालांकि जयराम महतो ने मूलवासी और आदिवासी समाज की भागीदारी का मुद्दा उठाकर चुनावी बहस को नया मोड़ दे दिया है। उनके बयान के बाद दोनों खेमे उनकी अगली राजनीतिक चाल पर नजर बनाए हुए हैं।

बढ़ा सियासी सस्पेंस

राज्यसभा चुनाव के मतदान से ठीक पहले झारखंड की राजनीति में सस्पेंस लगातार बढ़ता जा रहा है। जहां महागठबंधन अपनी संख्या को लेकर आश्वस्त नजर आ रहा है, वहीं एनडीए भी आखिरी समय तक राजनीतिक संभावनाओं को तलाशने में जुटा है।

अब सबकी निगाहें जयराम महतो के अंतिम फैसले और मतदान के दिन होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

Exit mobile version