राज्यसभा चुनाव में होटल पॉलिटिक्स की एंट्री, क्या बीजेपी को सता रहा है क्रॉस वोटिंग का डर?
रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। मतदान से ठीक पहले अब राज्य की राजनीति में “होटल पॉलिटिक्स” की एंट्री हो गई है। भाजपा ने अपने विधायकों को रांची के एक होटल में ठहराने की रणनीति अपनाई है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
राज्यसभा चुनाव की शुरुआत से ही महागठबंधन के विधायकों को दूसरे राज्य के रिसॉर्ट या होटल में शिफ्ट किए जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं। कांग्रेस के कुछ नेताओं की ओर से विधायकों को कर्नाटक भेजने की चर्चा भी सामने आई थी, लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी। पार्टी का तर्क था कि राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का कार्य चल रहा है और ऐसे समय में विधायकों का झारखंड में मौजूद रहना जरूरी है।
परिमल नाथवानी की एंट्री से बदला चुनावी माहौल
राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नाथवानी के मैदान में आने के बाद चुनावी मुकाबला अचानक दिलचस्प हो गया। उनके नामांकन के बाद राजनीतिक हलकों में क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।
शुरुआती दौर में माना जा रहा था कि नाथवानी को भाजपा के अलावा कुछ अन्य दलों के विधायकों का भी समर्थन मिल सकता है। इसी वजह से चुनावी गणित को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे।
भाजपा की रणनीति पर उठ रहे सवाल
मतदान से पहले भाजपा विधायकों को एक होटल में ठहराए जाने के फैसले ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। विपक्षी खेमे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि भाजपा को अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है, तो फिर उन्हें एकजुट रखने के लिए होटल में ठहराने की जरूरत क्यों पड़ी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि होटल पॉलिटिक्स आमतौर पर तब देखने को मिलती है जब किसी दल को क्रॉस वोटिंग या राजनीतिक जोड़-तोड़ की आशंका होती है। हालांकि भाजपा की ओर से इसे केवल चुनावी रणनीति और समन्वय का हिस्सा बताया जा रहा है।
महागठबंधन दिखा रहा एकजुटता
दूसरी ओर महागठबंधन के नेता लगातार एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सक्रियता के बाद गठबंधन खेमे में पहले की तुलना में अधिक आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है।
सूत्रों के अनुसार, मतदान से पहले गठबंधन के विधायकों के लिए मॉक पोल की तैयारी भी की गई है ताकि वोटिंग प्रक्रिया में किसी तरह की तकनीकी गलती की संभावना न रहे।
दोनों सीटों पर नजर
झारखंड में इस बार राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। महागठबंधन दोनों सीटों पर जीत का दावा कर रहा है, जबकि भाजपा समर्थित उम्मीदवार की मौजूदगी ने मुकाबले को रोचक बना दिया है।
अब सबकी नजर मतदान और मतगणना पर टिकी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनावी गणित हकीकत में किस ओर जाता है और क्या राज्यसभा चुनाव में कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिलता है।
