झारखंड कांग्रेस में बगावत पर एक्शन: पूर्व मंत्री KN त्रिपाठी को शो-कॉज नोटिस, 7 दिनों में मांगा जवाब
Ranchi: झारखंड कांग्रेस में सार्वजनिक बयानबाजी को लेकर प्रदेश नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता केएन त्रिपाठी को कारण बताओ (Show Cause) नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है। मामला 28 जुलाई को पलामू में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कानून-व्यवस्था, पुलिस और गृह विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर दिए गए उनके बयानों से जुड़ा है।
प्रदेश कांग्रेस का कहना है कि पार्टी नेताओं को अपनी बात और असहमति रखने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए संगठन के अंदर निर्धारित मंच मौजूद हैं। सार्वजनिक रूप से ऐसी बयानबाजी, जिससे पार्टी या महागठबंधन की एकजुटता प्रभावित हो, संगठनात्मक अनुशासन के अनुरूप नहीं है।
केएन त्रिपाठी के बयान पर क्यों नाराज हुई कांग्रेस?
पार्टी के मुताबिक, 28 जुलाई को पलामू में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केएन त्रिपाठी ने राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिस और गृह विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए थे।
प्रदेश नेतृत्व ने इन बयानों को गंभीरता से लेते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। कांग्रेस का कहना है कि किसी नेता को सरकार या संगठन से जुड़े किसी मुद्दे पर आपत्ति है तो उसे पार्टी के आंतरिक मंच पर उठाया जाना चाहिए।
‘महागठबंधन धर्म और अनुशासन सर्वोपरि’
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि पार्टी में सामूहिक जिम्मेदारी और महागठबंधन धर्म सर्वोपरि है। कांग्रेस एक अनुशासित संगठन है और प्रत्येक नेता एवं कार्यकर्ता के लिए संगठनात्मक मर्यादा का पालन करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि नेताओं को पार्टी के अंदर अपनी बात रखने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन सार्वजनिक मंच से ऐसी बयानबाजी नहीं की जानी चाहिए, जिससे संगठन की छवि या गठबंधन की एकजुटता प्रभावित हो।
प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर जारी हुआ नोटिस
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के निर्देश पर केएन त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में उनसे अपने सार्वजनिक बयानों को लेकर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
केएन त्रिपाठी को इसके लिए सात दिनों का समय दिया गया है।
जवाब के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
पार्टी की ओर से फिलहाल केएन त्रिपाठी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उनके जवाब की समीक्षा के बाद प्रदेश नेतृत्व आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकता है।
इस कार्रवाई के जरिए झारखंड कांग्रेस ने संकेत दिया है कि पार्टी सार्वजनिक बयानबाजी और संगठनात्मक अनुशासन को लेकर सख्ती बरतेगी तथा नेताओं से अपनी असहमति पार्टी के निर्धारित मंचों पर रखने की अपेक्षा करेगी।
