Jharkhand News: झारखंड नगर निकाय चुनाव के नामांकन की प्रक्रिया खत्म होते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर ‘अपनों’ की बगावत ने पार्टी नेतृत्व की नींद उड़ा दी है। राज्य के कई महत्वपूर्ण नगर निगमों में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ भाजपा कार्यकर्ताओं और दिग्गज नेताओं के परिजनों ने ही ताल ठोंक दी है। इस संकट से निपटने के लिए एक ओर प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने अनुशासन का डंडा दिखाया है, तो दूसरी ओर बड़े नेताओं को मान-मनौव्वल की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
धनबाद: संजीव सिंह की दावेदारी ने बढ़ाई टेंशन
कोयलांचल की सबसे हॉट सीट धनबाद में भाजपा धर्मसंकट में है। भाजपा विधायक रागिनी सिंह के पति संजीव सिंह ने मेयर पद के लिए निर्दलीय नामांकन कर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पार्टी ने यहां संजीव अग्रवाल को अपना समर्थन दिया है। पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल पहले ही भाजपा छोड़ झामुमो का दामन थाम चुके हैं। अब सांसद ढुलू महतो और प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू संजीव सिंह को मनाने की कोशिशों में जुटे हैं।
देवघर: सांसद निशिकांत दुबे पर टिकी नजरें
देवघर नगर निगम में भी स्थिति काफी पेचीदा है। पार्टी ने रीता चौरसिया को मैदान में उतारा है, लेकिन उनके सामने युवा भाजपा नेता बाबा बलियासे ने पर्चा भर दिया है। बाबा बलियासे सांसद निशिकांत दुबे के बेहद करीबी माने जाते हैं। ऐसे में अब पूरी जिम्मेदारी निशिकांत दुबे पर है कि वे उन्हें मनाकर नामांकन वापस करवाएं।
पलामू और रांची में भी ‘भीतरघात’ का डर
- पलामू: भाजपा समर्थित प्रत्याशी अरुणा शंकर के सामने पार्टी की ही जानकी ओझा समेत तीन अन्य कार्यकर्ताओं ने नामांकन कर दिया है। वरिष्ठ नेता लगातार उनसे संपर्क साध रहे हैं।
- रांची: राजधानी में रोशनी खलखो के सामने कोई बड़ा बागी चेहरा तो नहीं है, लेकिन ‘भीतरघात’ की आशंका को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने मंडल से लेकर जिला स्तर तक के कार्यकर्ताओं की विशेष क्लास ली है।
अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं: आदित्य साहू
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। “पार्टी का हर कार्यकर्ता कमल के फूल और अधिकृत प्रत्याशी के लिए काम करने को प्रतिबद्ध है। जो लोग निजी महत्वाकांक्षा के लिए पार्टी के फैसलों को चुनौती दे रहे हैं, वे नामांकन वापसी की तिथि (6 फरवरी) तक अपना निर्णय बदल लें, वरना कार्रवाई सुनिश्चित है।” पार्टी की रणनीति अब ‘डैमेज कंट्रोल’ मोड में है। 6 फरवरी को नाम वापसी की आखिरी तारीख है। भाजपा नेतृत्व को उम्मीद है कि निशिकांत दुबे, ढुलू महतो और अन्य सांसद-विधायक अपने-अपने क्षेत्रों के बागियों को बिठाने में सफल रहेंगे।
