Jharkhand Municipal Election: “लाखों लोग नहीं कर पाएंगे मतदान”, बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर साधा निशाना
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Jharkhand Municipal Election: झारखंड में 23 फरवरी 2026 को होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर ‘पुराने डेटा’ के आधार पर चुनाव कराने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। मरांडी का दावा है कि सरकार की इस जिद के कारण राज्य के लाखों युवा और नए मतदाता अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करने से वंचित रह जाएंगे।
क्या है पूरा विवाद?
बाबूलाल मरांडी के अनुसार, राज्य सरकार इन चुनावों को 1 अक्टूबर 2024 की पुरानी मतदाता सूची के आधार पर आयोजित करने की तैयारी में है। उन्होंने पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा:
नए मतदाताओं की अनदेखी: पिछले 15 महीनों (1 अक्टूबर 2024 के बाद) में जिन युवाओं का नाम मतदाता सूची में जुड़ा है, वे इस चुनाव में न तो मतदान कर पाएंगे और न ही प्रत्याशी बन सकेंगे।
स्थानांतरित वोटर: वे लोग जिन्होंने अपना नाम एक वार्ड से दूसरे वार्ड या शहर में ट्रांसफर कराया है, वे भी इस सूची के कारण प्रभावित होंगे।
लोकतंत्र के विरुद्ध: मरांडी ने इसे लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत बताते हुए मांग की है कि चुनाव अपडेटेड वोटर लिस्ट के आधार पर कराए जाएं।
मुख्यमंत्री पर सीधा हमला
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को टैग करते हुए कड़ी खरी-खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि “मुख्यमंत्री जी, आपके मुंह से संविधान की दुहाई शोभा नहीं देती। संविधान की आड़ में असंवैधानिक काम करना आपकी पहचान बन चुकी है। जांच एजेंसियों के नोटिस की अवहेलना और भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को बचाना आपकी संविधान विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।”
निकाय चुनाव 2026: एक नजर में
झारखंड के 9 नगर निगमों सहित कुल 48 नगर निकायों में चुनावी प्रक्रिया अपने चरम पर है:
नामांकन प्रक्रिया: नामांकन का दौर पूरा हो चुका है।
मैदान में उम्मीदवार: कुल 6,555 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
विभाजन: महापौर और अध्यक्ष पद के लिए 598, जबकि वार्ड पार्षद के लिए 5,957 उम्मीदवार मैदान में हैं।
मतदान की तारीख: 23 फरवरी 2026 को वोट डाले जाएंगे।
नेता प्रतिपक्ष की इस आपत्ति ने निकाय चुनावों की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार इस पर कोई संज्ञान लेती है या चुनाव इसी विवादित सूची के साथ आगे बढ़ते हैं।