Iran-USA Conflict: पश्चिमी एशिया में युद्ध की आहट अब केवल आसमान तक सीमित नहीं रही। मिसाइल और ड्रोन हमलों के दौर के बीच अब अमेरिका के संभावित जमीनी अभियान (Ground Operation) की चर्चा तेज हो गई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, Donald Trump प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए निष्क्रिय करने हेतु एक रणनीतिक कदम उठाने पर विचार कर रहा है।
सीमित सैन्य अभियान (Limited Deployment) की रणनीति: Iran-USA Conflict
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में एक बड़े सैन्य युद्ध के बजाय सीमित संख्या में सैनिकों की तैनाती में रुचि दिखाई है।
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लक्ष्य: इसका उद्देश्य पूरे देश पर कब्जा करना नहीं, बल्कि विशिष्ट परमाणु ठिकानों को नियंत्रण में लेना है।
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रणनीति: ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तर्ज पर विशेष बलों (Special Forces) का उपयोग करके महत्वपूर्ण यूरेनियम केंद्रों को निशाना बनाना।
यूरेनियम भंडार, अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता: Iran-USA Conflict
अमेरिका और इजरायल के बीच हुई चर्चाओं का मुख्य केंद्र ईरान का अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) है।
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450 किलोग्राम का खतरा: ईरान के पास लगभग 450 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार है, जो 60% तक शुद्ध है।
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वेपन-ग्रेड क्षमता: विशेषज्ञों का मानना है कि इसे हथियार-ग्रेड यूरेनियम (90% शुद्धता) में बदलने में केवल कुछ हफ्तों का समय लग सकता है।
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किलेबंद ठिकाने: ये भंडार जमीन के काफी नीचे और भारी सुरक्षा वाले बंकरों में रखे गए हैं, जहाँ केवल जमीनी सेना ही पहुँच सकती है।
ट्रंप प्रशासन के पास मौजूद दो बड़े विकल्प: Iran-USA Conflict
व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, यूरेनियम के खतरे से निपटने के लिए दो मुख्य योजनाओं पर मंथन चल रहा है:
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यूरेनियम का निष्कासन (Removal): विशेष कमांडो ऑपरेशन के जरिए यूरेनियम के भंडार को जब्त कर ईरान से बाहर ले जाना।
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वैज्ञानिक डाइल्यूशन (Dilution): परमाणु विशेषज्ञों और IAEA के वैज्ञानिकों को उन ठिकानों पर भेजना, ताकि वे यूरेनियम को इस हद तक पतला (Dilute) कर दें कि वह बम बनाने के काम न आ सके।
क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की आहट है?
डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वे बड़े पैमाने पर सैनिकों की तैनाती के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन ‘बड़े लक्ष्यों’ के लिए जमीनी कार्रवाई से इनकार भी नहीं किया है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो का यह बयान कि “किसी को तो जाकर उसे हासिल करना होगा,” इस बात की पुष्टि करता है कि आने वाले समय में ईरान की धरती पर अमेरिकी या इजरायली विशेष बल (Special Forces) एक्शन में दिख सकते हैं।
