Hormuz में बिछीं इंटरनेट केबल्स पर युद्ध का साया, क्या ठप होगा भारत का इंटरनेट?

दुबई/नई दिल्ली | Hormuz: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ी जंग अब केवल मिसाइलों और तेल टैंकरों तक सीमित नहीं रह गई है।

समुद्र की गहराई में बिछीं वो बारीक फाइबर-ऑप्टिक केबल्स, जो पूरी दुनिया को इंटरनेट से जोड़ती हैं, अब इस महायुद्ध के निशाने पर हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में बिछीं ये इंटरनेट केबल्स कटीं, तो भारत समेत पूरी दुनिया में डिजिटल ब्लैकआउट या इंटरनेट की रफ्तार में भारी गिरावट आ सकती है।

Hormuz News: क्यों बढ़ी इंटरनेट की चिंता?

दुनिया का लगभग 99% इंटरनेशनल डेटा ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी इन सबमरीन केबल्स के जरिए चलता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर (Red Sea) ऐसे दो ‘चोकपॉइंट’ हैं जहाँ से एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ने वाली मुख्य केबल्स गुजरती हैं।

Hormuz में बिछा है ‘केबल्स का जाल’

होर्मुज जलडमरूमध्य न केवल तेल के लिए, बल्कि डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए भी दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण धमनियों में से एक है। यहाँ से गुजरने वाले प्रमुख केबल सिस्टम में शामिल हैं:

  1. AAE-1 (Asia-Africa-Europe 1)

  2. FALCON (Flag Atlantic)

  3. GBI (Gulf Bridge International)

  4. Tata TGN-Gulf

खतरे की वजह: होर्मुज का रास्ता काफी संकरा है और यहाँ पानी की गहराई महज 200 फीट तक है। ऐसे में युद्धक जहाजों के लंगर (Anchors), समुद्री बारूद (Mines) या जानबूझकर की गई तोड़फोड़ से इन केबल्स के कटने का डर सबसे ज्यादा है।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है क्योंकि भारत का लगभग एक-तिहाई (33%) वेस्टबाउंड इंटरनेट ट्रैफिक (यूरोप और अमेरिका की ओर जाने वाला डेटा) इन्हीं रास्तों से होकर गुजरता है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

इंटरनेट विश्लेषक डौग मैडोरी (केंटिक के निदेशक) के अनुसार, “लाल सागर और होर्मुज दोनों चोकपॉइंट्स का एक साथ बंद होना एक ग्लोबल डिजिटल डिजास्टर होगा।” भारत फिलहाल अपनी कनेक्टिविटी के लिए वैकल्पिक रास्तों (जैसे सुदूर पूर्व के रास्ते अमेरिका से जुड़ना) पर विचार कर रहा है, लेकिन वे मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

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