Hormuz में बिछीं इंटरनेट केबल्स पर युद्ध का साया, क्या ठप होगा भारत का इंटरनेट?

दुबई/नई दिल्ली | Hormuz: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ी जंग अब केवल मिसाइलों और तेल टैंकरों तक सीमित नहीं रह गई है।
समुद्र की गहराई में बिछीं वो बारीक फाइबर-ऑप्टिक केबल्स, जो पूरी दुनिया को इंटरनेट से जोड़ती हैं, अब इस महायुद्ध के निशाने पर हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में बिछीं ये इंटरनेट केबल्स कटीं, तो भारत समेत पूरी दुनिया में डिजिटल ब्लैकआउट या इंटरनेट की रफ्तार में भारी गिरावट आ सकती है।
Hormuz News: क्यों बढ़ी इंटरनेट की चिंता?
दुनिया का लगभग 99% इंटरनेशनल डेटा ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी इन सबमरीन केबल्स के जरिए चलता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर (Red Sea) ऐसे दो ‘चोकपॉइंट’ हैं जहाँ से एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ने वाली मुख्य केबल्स गुजरती हैं।
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दोहरा संकट: लाल सागर में पहले से ही हुती विद्रोहियों के हमलों के कारण कई केबल्स (जैसे SEA-ME-WE 4) क्षतिग्रस्त हैं। अब होर्मुज के बंद होने से ‘बैकअप’ रास्ता भी खतरे में है।
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मेटा का बड़ा फैसला: युद्ध के बढ़ते खतरे को देखते हुए फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) ने अपने महत्वाकांक्षी ‘2Africa’ केबल प्रोजेक्ट के उस हिस्से पर काम रोक दिया है जो खाड़ी देशों और भारत को जोड़ने वाला था।
Hormuz में बिछा है ‘केबल्स का जाल’
होर्मुज जलडमरूमध्य न केवल तेल के लिए, बल्कि डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए भी दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण धमनियों में से एक है। यहाँ से गुजरने वाले प्रमुख केबल सिस्टम में शामिल हैं:
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AAE-1 (Asia-Africa-Europe 1)
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FALCON (Flag Atlantic)
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GBI (Gulf Bridge International)
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Tata TGN-Gulf
खतरे की वजह: होर्मुज का रास्ता काफी संकरा है और यहाँ पानी की गहराई महज 200 फीट तक है। ऐसे में युद्धक जहाजों के लंगर (Anchors), समुद्री बारूद (Mines) या जानबूझकर की गई तोड़फोड़ से इन केबल्स के कटने का डर सबसे ज्यादा है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है क्योंकि भारत का लगभग एक-तिहाई (33%) वेस्टबाउंड इंटरनेट ट्रैफिक (यूरोप और अमेरिका की ओर जाने वाला डेटा) इन्हीं रास्तों से होकर गुजरता है।
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इंटरनेट की धीमी रफ्तार: यदि केबल्स कटती हैं, तो डेटा को लंबे रास्तों से ‘रूट’ करना पड़ेगा, जिससे लेटेंसी (Latency) बढ़ जाएगी। वीडियो कॉलिंग, ऑनलाइन गेमिंग और क्लाउड सर्विसेज में भारी रुकावट आएगी।
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बैंकिंग और AI ठप: अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग ट्रांजेक्शन, शेयर बाजार और रिलायंस जियो व गूगल के नए डेटा सेंटर्स, जो खाड़ी देशों में बन रहे हैं, बुरी तरह प्रभावित होंगे।
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मरम्मत में आएगी मुश्किल: केबल ठीक करने वाले विशेष जहाज (Cable-ships) युद्ध क्षेत्र में जाने से कतरा रहे हैं। एक बार केबल कटने पर उसे ठीक होने में महीनों लग सकते हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
इंटरनेट विश्लेषक डौग मैडोरी (केंटिक के निदेशक) के अनुसार, “लाल सागर और होर्मुज दोनों चोकपॉइंट्स का एक साथ बंद होना एक ग्लोबल डिजिटल डिजास्टर होगा।” भारत फिलहाल अपनी कनेक्टिविटी के लिए वैकल्पिक रास्तों (जैसे सुदूर पूर्व के रास्ते अमेरिका से जुड़ना) पर विचार कर रहा है, लेकिन वे मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
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