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झारखंड में 90% सब्सिडी पर बकरा, सूकर और मुर्गी पालन योजना, जानिए कैसे करें आवेदन

₹49,600 का बकरा सेट सिर्फ ₹4,960 में!

झारखंड सरकार की बंपर योजना: 49,600 रुपये का बकरा सेट सिर्फ 4,960 में, 90% तक सब्सिडी का मिलेगा लाभ

Ranchi: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से झारखंड सरकार ने मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना 2026-27 के तहत बड़ा अभियान शुरू किया है। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग द्वारा रांची जिले में विभिन्न पशुपालन योजनाओं के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

योजना के तहत अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC), असहाय विधवा महिलाओं, दिव्यांगों और 50 वर्ष से अधिक आयु के निःसंतान दंपत्तियों को 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। वहीं अन्य वर्गों के लाभार्थियों को 75 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिलेगा।

बकरा विकास योजना में 90% सब्सिडी

योजना के तहत 8 मादा और 2 नर बकरों के सेट की कुल लागत 49,600 रुपये निर्धारित की गई है।

  • 90% सब्सिडी श्रेणी: लाभार्थी को केवल 4,960 रुपये देने होंगे।
  • 75% सब्सिडी श्रेणी: लाभार्थी को 12,400 रुपये अंशदान देना होगा।

सूकर पालन योजना

4 मादा और 1 नर सूकर के यूनिट पर:

  • कुल लागत: 57,800 रुपये
  • 90% सब्सिडी पर लाभार्थी अंशदान: 5,780 रुपये
  • 75% सब्सिडी पर लाभार्थी अंशदान: 14,450 रुपये

कुक्कुट पालन पर भी बड़ा लाभ

बैकयार्ड लेयर कुक्कुट पालन (400 चूजे)

  • कुल लागत: 1,18,200 रुपये
  • 90% सब्सिडी: लाभार्थी अंशदान 11,820 रुपये
  • 75% सब्सिडी: लाभार्थी अंशदान 29,550 रुपये

ब्रायलर कुक्कुट पालन (500 चूजे)

  • कुल लागत: 67,500 रुपये
  • 90% सब्सिडी: 6,750 रुपये
  • 75% सब्सिडी: 16,875 रुपये

बत्तख और भेड़ पालन योजना भी शामिल

बत्तख चूजा वितरण योजना

  • 30 चूजों की इकाई
  • कुल लागत: 3,400 रुपये
  • 90% सब्सिडी पर केवल 340 रुपये
  • 75% सब्सिडी पर 850 रुपये

भेड़ पालन योजना

  • 8 मादा और 2 नर भेड़
  • कुल लागत: 49,600 रुपये
  • 90% सब्सिडी पर 4,960 रुपये
  • 75% सब्सिडी पर 12,400 रुपये

चयन प्रक्रिया और जरूरी शर्तें

  • लाभार्थियों का चयन ग्राम सभा की अनुशंसा के आधार पर किया जाएगा।
  • आवेदक का झारखंड का स्थानीय निवासी होना अनिवार्य है।
  • आवेदन के साथ आवासीय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और आधार कार्ड की प्रति जमा करनी होगी।
  • पशु-पक्षियों के लिए शेड निर्माण की व्यवस्था मनरेगा के माध्यम से की जाएगी।
  • चयनित लाभार्थी को निर्धारित अंशदान राशि एक माह के भीतर बैंक खाते में जमा करनी होगी, जिसके बाद पशु-पक्षी उपलब्ध कराए जाएंगे।

ग्रामीण रोजगार और आय बढ़ाने की पहल

सरकार का मानना है कि मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ बेरोजगार युवाओं, महिलाओं और छोटे किसानों के लिए आय का नया स्रोत बनेगी। इससे राज्य में दूध, मांस, अंडा और ऊन उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

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