
JPSC-JSSC विवाद: संवाद से निकलेगा समाधान, छात्रों की मांगों पर संवेदनशीलता से विचार करेगी सरकार – मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू
Ranchi: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने की प्रतिबद्धता दोहराई है। राज्य के शहरी विकास मंत्री एवं झामुमो विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पहल पर गठित उच्चस्तरीय समिति छात्रों से संवाद कर उनकी मांगों पर गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ विचार करेगी।
संवाद ही लोकतांत्रिक समाधान का रास्ता
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी विवाद का सबसे प्रभावी समाधान संवाद और विमर्श के माध्यम से ही निकलता है। उन्होंने बताया कि सरकार की पहल के बाद छात्रों की ओर से भी सकारात्मक संकेत मिले हैं और छात्र प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि बातचीत के जरिए ऐसा समाधान निकलेगा, जिससे छात्रों की चिंताओं का उचित निराकरण हो सके।
सरकार ने पहले ही शुरू कर दी थी कार्रवाई
सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि जैसे ही भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के संकेत मिले, राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी थी। उन्होंने बताया कि मामले की CID जांच, छापेमारी और कई आरोपियों की गिरफ्तारी इसी गंभीरता का परिणाम है।
उन्होंने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार इस पूरे मामले को लेकर शुरू से गंभीर रही है और जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
BJP पर साधा निशाना
CBI जांच की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि पहले छात्र प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगें सरकार के समक्ष रखे, उसके बाद सरकार सभी बिंदुओं पर संवेदनशीलता के साथ विचार करेगी।
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पहली और दूसरी JPSC नियुक्तियों में किन नेताओं के रिश्तेदारों का चयन हुआ, यह राज्य की जनता जानती है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में युवाओं के हित में राजनीति करना चाहती है तो पहले अपने नेताओं से जवाब मांगे और वर्षों से लंबित मामलों की जांच को भी आगे बढ़ाने की पहल करे।
वार्ता से समाधान की उम्मीद
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक प्रयास कर रही है। सरकार का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से ऐसा समाधान निकालना है जिससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और युवाओं का भरोसा दोनों कायम रह सके।



