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बच्चों की मौत के बाद जागी सरकार? JMM ने भाजपा सरकार पर उठाए सवाल

बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत पर JMM का भाजपा सरकार पर हमला, लुईस मरांडी ने पूछा- पहले क्यों नहीं चेती व्यवस्था?

बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत पर JMM ने सरकार को घेरा, पूछा- पहले क्यों नहीं चेती व्यवस्था?

Newswave Desk: मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। गुरुवार को हरमू स्थित JMM के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक लुईस मरांडी और सुदीप गुड़िया ने आदिवासी बहुल इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार से सवाल किए।

30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत का दावा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में लुईस मरांडी ने दावा किया कि बालाघाट में बैगा और गोंड समुदाय के 30 से अधिक बच्चों की मौत की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग स्तर पर मौतों के आंकड़े सामने आए हैं और ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब बच्चों की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी, तब सरकारी तंत्र ने समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज आज भी स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और जल-जंगल-जमीन जैसे बुनियादी अधिकारों से जुड़े सवालों का सामना कर रहा है। सरकार की जिम्मेदारी है कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाओं को मजबूत किया जाए।

हालांकि, मौतों की संख्या और उनके कारणों से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के आधार पर नहीं हुई है।

आश्रमों में बच्चों की मौत पर भी उठाए सवाल

JMM नेता सुदीप गुड़िया ने आश्रमों में रहने वाले बच्चों की मौत को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में बच्चों की मौत को सामान्य घटना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

उनका आरोप है कि मौतों के बाद सरकार का सक्रिय होना व्यवस्था की गंभीर कमी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मामले में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप की जरूरत पड़ना भी सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने की मांग

JMM नेताओं ने आदिवासी बहुल और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि समय पर इलाज, पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

पार्टी नेताओं ने बालाघाट मामले में सरकार से जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

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