JSSC-CGL पेपर लीक मामले में CID की बड़ी पहल, आम लोगों से मांगे सबूत; जारी किया मोबाइल नंबर और ईमेल
Ranchi: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) परीक्षा-2023 में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच अब और तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही CID की विशेष जांच टीम (SIT) ने अभ्यर्थियों और आम लोगों से सीधे साक्ष्य उपलब्ध कराने की अपील की है।
CID ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति के पास परीक्षा में गड़बड़ी, पेपर लीक या किसी अन्य अनियमितता से जुड़ी ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, दस्तावेज, चैट या अन्य ठोस जानकारी है, तो वह SIT के साथ साझा कर सकता है। जांच एजेंसी ने सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने का भरोसा दिया है।
CID ने जारी किया मोबाइल नंबर और ईमेल
SIT ने लोगों से जानकारी साझा करने के लिए संपर्क माध्यम भी जारी किए हैं।
मोबाइल/WhatsApp: 9771432118
ईमेल: cglinfo@jhpolice.gov.in
CID की अपील है कि मामले से जुड़ी कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी या साक्ष्य उपलब्ध होने पर उसे जांच टीम तक पहुंचाया जाए।
37 संदिग्धों से हो चुकी है पूछताछ
JSSC-CGL मामले में CID अब तक 37 संदिग्धों को नोटिस देकर पूछताछ कर चुकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, CID ने इस मामले में जनवरी 2025 में कांड संख्या 1/2025 दर्ज कर जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान कथित तौर पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से पैसे लेने और उन्हें गेस पेपर देकर ठगी करने की बात सामने आई थी। अब सरकार के नए निर्देश के बाद जांच एजेंसी ने मामले के सभी पहलुओं की दोबारा गहन पड़ताल शुरू की है।
अभय तिवारी से पूछताछ के बाद जांच में तेजी
JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ी जांच के दौरान आरोपी अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद CID की जांच का दायरा और बढ़ा है।
बताया गया है कि अभय तिवारी खुद JSSC-CGL परीक्षा में सफल होकर सरकारी नौकरी में आया था। उसकी पत्नी के भी परीक्षा में सफल होने की जानकारी सामने आई है।
CID अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अभय तिवारी ने JSSC-CGL समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता कैसे हासिल की और क्या इन परीक्षाओं में किसी तरह की अनियमितता हुई थी।
CID को आम लोगों से क्यों चाहिए ऑडियो-वीडियो और चैट?
जांच एजेंसी का उद्देश्य परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं के संबंध में अधिक से अधिक प्रत्यक्ष और डिजिटल साक्ष्य जुटाना है।
ऐसे में जिन अभ्यर्थियों या आम लोगों के पास परीक्षा से पहले या परीक्षा के दौरान संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े:
- ऑडियो रिकॉर्डिंग
- वीडियो
- WhatsApp चैट
- दस्तावेज
- पैसे के लेन-देन से जुड़ी जानकारी
- पेपर या प्रश्नों से जुड़ी सामग्री
- अन्य ठोस साक्ष्य
मौजूद हैं, वे SIT को उपलब्ध करा सकते हैं।
JPSC 14वीं परीक्षा का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
इधर, JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित गड़बड़ी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।
सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई 24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होने की जानकारी दी गई है।
याचिका में परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच CBI से कराने की मांग की गई है।
OMR शीट को लेकर भी उठाए गए सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, OMR शीट की कस्टडी और मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।
याचिका में एक सफल अभ्यर्थी की कथित OMR कार्बन कॉपी वायरल होने का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि अभ्यर्थी ने पहले पेपर में 100 में से 48 प्रश्नों के उत्तर दिए थे, इसके बावजूद उसे सफल घोषित किया गया।
अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और CID की SIT जांच, दोनों पर झारखंड के हजारों अभ्यर्थियों की नजर है।
