Bihar: बिहार में अब ‘मनमानी’ कार्रवाई नहीं, अफसरों पर एक्शन का मास्टर सर्कुलर जारी, मुख्य सचिव ने दी ट्रेनिंग

Bihar: बिहार सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों पर होने वाली अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) की प्रक्रिया को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए बड़ी पहल की है। 15 जनवरी 2026 को पुराने सचिवालय में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय ट्रेनिंग सेशन आयोजित किया गया, जिसमें राज्य के सभी शीर्ष अधिकारियों को कानूनी पेचीदगियों का पाठ पढ़ाया गया।

नियमों की ‘मास्टर सर्कुलर’ और हैंडबुक जारी

बैठक में महानिदेशक सह मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने बताया कि सरकार ने अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े सभी पुराने परिपत्रों को मिलाकर एक ‘मास्टर सर्कुलर’ जारी किया है। इसके अलावा, संविधान के अनुच्छेद 311 और सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट के फैसलों को मिलाकर एक किताब भी तैयार की गई है। इसका मकसद यह है कि किसी भी अधिकारी पर कार्रवाई करते समय कानूनी गलती न हो और प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रहे।

लेवल-9 अफसरों पर एक्शन से पहले BPSC की राय जरूरी

ट्रेनिंग में स्पष्ट किया गया कि लेवल-9 और उससे ऊपर के अधिकारियों को सजा सुनाने से पहले ‘बिहार लोक सेवा आयोग’ (BPSC) से परामर्श लेना अनिवार्य है। अक्सर देखा गया है कि बिना चार्जशीट (आरोप-पत्र) के ही अधिकारियों को लघु दंड दे दिया जाता है, जिसे अब गलत बताया गया है। अधिकारियों को हिदायत दी गई कि आरोप-पत्र सही शब्दावली में और विधिवत गठित होना चाहिए।

निलंबन और जांच में देरी नहीं होगी बर्दाश्त

बैठक में ‘निलंबन अवधि’ (Suspension Period) के समयबद्ध निपटारे पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को बताया गया कि निलंबन के बाद भत्तों और दंड का फैसला एक ही संकल्प में कैसे जारी करना है, ताकि कानूनी अड़चन न आए। यह भी साफ किया गया कि निलंबन को रेगुलराइज करने में देरी होने से दंड का असली मकसद ही खत्म हो जाता है, इसलिए इसमें लापरवाही न बरतें।

 

 

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