Bangladesh: मुझे महल का कैदी बनाकर रखा,” राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने खोले मोहम्मद यूनुस के ‘राज’

ढाका : Bangladesh में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार के सत्ता संभालने के कुछ ही दिनों बाद एक बड़ा संवैधानिक संकट उभर कर सामने आया है।

राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पूर्व मुख्य सलाहकार और नोबेल विजेता प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए उन्हें ‘तानाशाह’ की तरह व्यवहार करने वाला बताया है। राष्ट्रपति का दावा है कि यूनुस के डेढ़ साल के शासनकाल में संविधान की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।

Bangladesh News: “महल के कैदी” की तरह बीते डेढ़ साल

बंगाली दैनिक ‘कलेर कंठो’ को दिए एक विस्फोटक साक्षात्कार में राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा:

Bangladesh News: संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन और गुप्त समझौते

राष्ट्रपति ने अंतरिम सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं:

  1. अध्यादेशों की बाढ़: उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस औचित्य के 133 अध्यादेश जारी किए गए, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान था।

  2. अमेरिका से गुप्त डील: राष्ट्रपति ने खुलासा किया कि उन्हें अमेरिका के साथ हुए किसी भी अंतिम समझौते की जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा, “संवैधानिक रूप से मुझे सूचित किया जाना अनिवार्य था, लेकिन उन्होंने मुझे पूरी तरह अंधेरे में रखा।”

Bangladesh News: तख्तापलट और पद से हटाने की ‘भयानक साजिश’

राष्ट्रपति ने एक गहरी साजिश का खुलासा करते हुए बताया कि उन्हें असंवैधानिक तरीके से हटाने की कोशिश की गई थी।

सेना और बीएनपी ने बचाया लोकतंत्र

शहाबुद्दीन ने स्पष्ट किया कि संकट के समय बांग्लादेशी सेना और बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) ने उनका साथ दिया। सेना प्रमुखों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में उनकी हार पूरे देश की हार मानी जाएगी, जिसे किसी भी कीमत पर रोका जाएगा।

राष्ट्रपति के इन खुलासों ने प्रोफेसर यूनुस की अंतरिम सरकार की छवि पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अब सबकी नजरें तारिक रहमान सरकार पर हैं कि वह इन गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और क्या इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी।

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