Jharkhand News: दिल्ली में होगी जनजातीय गर्जना रैली, झारखंड से 4500 आदिवासी प्रतिनिधि होंगे शामिल

Delhi Garjana Rally: लाल किला मैदान में जुटेंगे लाखों आदिवासी प्रतिनिधि

Jharkhand News: नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में आयोजित होने जा रहे ‘जनजातीय सांस्कृतिक समागम एवं गर्जना रैली’ को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। Janjati Suraksha Manch के तत्वावधान में होने वाले इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में झारखंड समेत देशभर से बड़ी संख्या में आदिवासी प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah शामिल होंगे। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम करेंगे।

झारखंड से विशेष ट्रेन से जाएंगे प्रतिनिधि: Jharkhand News

जनजाति सुरक्षा मंच के पदाधिकारियों के अनुसार झारखंड से करीब 4500 आदिवासी प्रतिनिधि 22 मई को विशेष ट्रेन से दिल्ली रवाना होंगे। प्रतिनिधि अपने साथ मांदर, ढोल, नगाड़ा, ढाक जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र और पारंपरिक वेशभूषा लेकर जाएंगे, ताकि राष्ट्रीय मंच पर झारखंड की आदिवासी संस्कृति की पहचान प्रस्तुत की जा सके।

डीलिस्टिंग मुद्दे पर होगी चर्चा: Jharkhand News

समागम में आदिवासी समाज की संस्कृति, अधिकार और ‘डीलिस्टिंग’ जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। ‘डीलिस्टिंग’ का मुद्दा धर्मांतरण कर चुके आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति सूची से बाहर करने की मांग से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर लंबे समय से बहस चल रही है।

कई संगठनों ने किया बहिष्कार: Jharkhand News

जहां एक ओर कार्यक्रम को लेकर तैयारियां चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर कई आदिवासी और मूलवासी संगठनों ने इसका विरोध और बहिष्कार करने की घोषणा की है। पूर्व मंत्री Geetashree Oraon समेत कई सामाजिक और पारंपरिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि डीलिस्टिंग के नाम पर आदिवासी समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है।

“आदिवासी संस्कृति को किसी ढांचे में न बांधा जाए”

बहिष्कार करने वाले संगठनों का कहना है कि आदिवासी समाज प्रकृति पूजक है और उसकी अलग सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति को किसी विशेष धार्मिक या राजनीतिक ढांचे में ढालने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कई प्रमुख संगठन विरोध में शामिल

कार्यक्रम के बहिष्कार का समर्थन करने वालों में कई सामाजिक, सांस्कृतिक और आदिवासी संगठन शामिल हैं। इनमें ग्राम सभा, सरना संगठन, आदिवासी महासंघ और विभिन्न जनाधिकार मंचों के प्रतिनिधि भी शामिल बताए जा रहे हैं। दिल्ली में होने वाला यह कार्यक्रम अब केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी पहचान, अधिकार और राजनीति से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है।

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