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BJP प्रदेश अध्यक्ष Aditya Sahu द्वारा प्रदेश उपाध्यक्ष नीलकंठ सिंह मुंडा की अध्यक्षता में किया गया था सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन

चान्हो (कदमटोली) घटना की जाँच को लेकर भाजपा द्वारा गठित कमेटी ने अपनी कलमबद्ध जांच रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष Aditya Sahu को सौंप दी है। प्रदेश अध्यक्ष की रिपोर्ट सौंपने के बाद कमेटी का नेतृत्व करने वाले प्रदेश उपाध्यक्ष नीलकंठ सिंह मुंडा ने प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता आयोजित कर पूरे घटनाक्रम से मीडिया को भी रूबरू कराया। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि यह घटना 25 मई की है। आज घटना का चौथा दिन है। पुलिस प्रशासन साफ देख रही है कि पीड़ित परिवार के साथ किस प्रकार निर्ममता से मारपीट की गई है। बावजूद अभी तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होना दुखद और निंदनीय है। प्रशासन टाल मटोल का रवैया अपना रहा है। प्रशासन मामले की लीपापोती में लगी हुई है। इससे साफ प्रतीत होता है कि सरकार के संरक्षण में सब कुछ किया जा रहा है। लेकिन बीजेपी इसे अनदेखा नहीं कर सकती है। सरकार और प्रशासन दोषियों को अविलंब गिरफ्तार करे। अगर वह ऐसा नहीं करती है तो भारतीय जनता पार्टी कानून के दायरे में रहकर आंदोलन करने को बाध्य होगी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाएगी। भाजपा, पीड़ित परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।

श्री मुंडा ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष Aditya Sahu के निर्देशानुसार पीड़ित परिवार के आवास पर जाकर परिवार के सभी सदस्यों से मुलाकात की गई एवं घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। पीड़ित परिवार एवं स्थानीय ग्रामीणों से विस्तृत जानकारी ली गई एवं उनकी व्यथा को ध्यान पूर्वक सुनकर तमाम चीजों को कलमबद्ध किया गया है।

श्री मुंडा ने कहा कि चान्हो मामले में जिस प्रकार सिंचाई के लिए पानी सप्लाई के लिए लगे पाइप के फटने की एक छोटी सी घटना के विवाद को वर्ग विशेष द्वारा सांप्रदायिक रूप दिया गया, वह दुखद और निंदनीय है। इस घटना को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया है। पीड़ित साहू परिवार इस इलाके में अल्पसंख्यक हैं। यह परिवार एक दो घर ही है। विवाद के बाद एक विशेष वर्ग के लगभग 50-60 व्यक्तियों की भीड़ पीड़ित के आवास पर पहुँचकर मुख्य द्वार की कुंडी तोड़ते हुए जबरन घर में अनाधिकृत रूप से प्रवेश कर जाती हैं और पूरे परिवार के साथ मारपीट की जाती है।

4 साल के बच्चे को उठाकर आँगन में फेंक दिया जाता है। तीन माह की गर्भवती महिला के पेट पर लात और घूंसों से मारा गया, उसके सिर को फोड़ दिया गया। यह अत्यंत गंभीर एवं अमानवीय है। महिला के पति का हाथ तोड़ दिया गया। घर के अन्य सदस्यों के साथ भी मारपीट की गई। हमलावरों द्वारा अत्यंत अशोभनीय, अपमानजनक एवं साम्प्रदायिक टिप्पणियां की गई तथा गौमांस खिलाने जैसी धमकियां भी दी गई। पीड़ित पक्ष के अनुसार, गांव में सीमित संख्या में हिंदू परिवारों का निवास होना भी घटना के कारणों में से एक प्रतीत होता है तथा भय एवं दबाव उत्पन्न कर गांव छोड़ने हेतु विवश करने के उद्देश्य से उक्त जानलेवा हमला किया गया। महिला के पति को हलाल करने तक की धमकी दी गई। आखिर इनका मनोबल इतना कैसे बढ़ा हुआ है ?

श्री मुंडा ने कहा कि दरअसल जब से झारखंड में अबुआ सरकार बनी है तब से सरकार में शामिल दल नहीं चाहते कि प्रदेश में सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहे। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार काफी डरा हुआ है। प्रशासन दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करे और पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करे। साथ ही इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो, इस पर प्रशासन को विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

जांच कमेटी द्वारा तैयार जांच रिपोर्ट का प्रतिवेदन नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाऊरी को भी सुपुर्द की गई है। प्रेस वार्ता के दौरान आरती कुजूर, योगेंद्र प्रताप सिंह, अजय साह और विनय जयसवाल भी मौजूद थे।

बता दें कि Aditya Sahu द्वारा उक्त मामले की जमीनी जांच के लिए नीलकंठ सिंह मुंडा की अध्यक्षता में सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया गया था। जिसमें पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष आरती कुजूर, पूर्व विधायक जीतू चरण राम, युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विनय जयसवाल, रांची पश्चिमी जिला अध्यक्ष नरेंद्र सिंह और पूर्व प्रत्याशी सन्नी टोप्पो शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने 27 मई को घटनास्थल का दौरा कर वस्तुस्थिति का जायजा लिया था।

 

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