
झारखंड राज्यसभा चुनाव में बढ़ी हलचल, परिमल नाथवानी फिर हो सकते हैं निर्दलीय उम्मीदवार
रांची: निर्वाचन आयोग द्वारा राज्यसभा की 24 सीटों पर चुनाव की घोषणा के बाद झारखंड की दो सीटों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य में एक सीट पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई है, जबकि दूसरी सीट भाजपा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के कारण रिक्त हो रही है।
इसी बीच झारखंड की राजनीति में एक बार फिर उद्योगपति और पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नाथवानी का नाम चर्चा में आ गया है। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि नाथवानी एक बार फिर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर सकते हैं।
2008 और 2014 में निर्दलीय जीत चुके हैं नाथवानी
परिमल नाथवानी इससे पहले 2008 और 2014 में झारखंड से निर्दलीय राज्यसभा सांसद चुने जा चुके हैं। खास बात यह रही कि 2008 के चुनाव में प्रथम वरीयता के वोट कम होने के बावजूद उन्होंने दूसरी वरीयता के वोटों के आधार पर जीत दर्ज की थी।
वर्तमान में वे आंध्र प्रदेश से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन उनका कार्यकाल समाप्ति की ओर है। हाल ही में मीडिया से बातचीत में नाथवानी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता सूची में झारखंड सबसे ऊपर है और वे राज्य के लिए काम करना चाहते हैं।
18 जून को होगा मतदान
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार:
- 1 जून: अधिसूचना जारी
- 8 जून: नामांकन की अंतिम तिथि
- 11 जून: नाम वापसी
- 18 जून: मतदान और मतगणना
राज्यसभा चुनाव के लिए झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं और एक उम्मीदवार की जीत के लिए 28 वोट जरूरी होंगे।
महागठबंधन मजबूत, लेकिन चुनौती बरकरार
सत्तारूढ़ महागठबंधन के पास फिलहाल 56 विधायक हैं। इसमें झामुमो, कांग्रेस, राजद और वाम दल शामिल हैं। अगर गठबंधन एकजुट होकर चुनाव लड़ता है तो दोनों सीटों पर उसकी स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
हालांकि, यदि घटक दल अलग-अलग उम्मीदवार उतारते हैं तो समीकरण बदल सकते हैं और क्रॉस वोटिंग की संभावना भी बढ़ सकती है।
भाजपा भी बना रही रणनीति
वहीं भाजपा और एनडीए भी चुनाव को लेकर रणनीति बनाने में जुट गए हैं। एनडीए के पास फिलहाल 24 वोट हैं, जो जीत के लिए पर्याप्त नहीं हैं। लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर मुकाबला बहुकोणीय हुआ तो चुनाव रोचक हो सकता है।
चार बड़े राजनीतिक समीकरण
- महागठबंधन साथ रहा तो दोनों सीटों पर जीत आसान
- झामुमो अकेले उतरा तो दूसरी सीट पर गणित बिगड़ सकता है
- कांग्रेस अलग उम्मीदवार उतारे तो गठबंधन में असहजता बढ़ सकती है
- भाजपा प्रत्याशी उतारती है तो क्रॉस वोटिंग और निर्दलीय फैक्टर अहम हो सकता है
राज्यसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही झारखंड की राजनीति में जोड़-तोड़ और रणनीति का दौर शुरू हो गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि महागठबंधन किस फार्मूले पर सहमति बनाता है और क्या परिमल नाथवानी एक बार फिर झारखंड की राजनीति में नई एंट्री करते हैं।



