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खरसावां गोलीकांड पर बनेगी फिल्म, विधायक दशरथ गागराई की बड़ी पहल

1948 खरसावां गोलीकांड अब पर्दे पर, स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मौका

खरसावां गोलीकांड पर बनेगी फिल्म: विधायक दशरथ गागराई की पहल, स्थानीय कलाकारों को मिलेगा बड़ा मंच

सरायकेला-खरसावां: झारखंड के इतिहास की एक अहम और संवेदनशील घटना—1948 के खरसावां गोलीकांड—को अब फिल्म के जरिए पर्दे पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। खरसावां के विधायक Dashrath Gagrai इस पहल को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसमें स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

हो भाषा में बनेगी फिल्म, स्क्रिप्ट तैयार

यह फिल्म हो भाषा में बनाई जाएगी, जिससे आदिवासी संस्कृति और इतिहास को व्यापक पहचान मिल सके। फिल्म की स्क्रिप्ट ओडिशा निवासी लक्ष्मण मुर्मू ने तैयार की है। इसके साथ ही एक और सामाजिक विषय पर आधारित हो फिल्म ‘हुडिंग माई’ (परिवार की सबसे छोटी बेटी) पर भी काम किया जा रहा है, जिसकी कहानी कालिया जामुदा (चमरु जामुदा) ने लिखी है।

स्थानीय कलाकारों के लिए सुनहरा मौका

इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि इसमें स्थानीय प्रतिभाओं को मौका दिया जाएगा। चाईबासा, जमशेदपुर, सरायकेला-खरसावां के अलावा ओडिशा और छत्तीसगढ़ के हो कलाकार भी इसमें हिस्सा ले सकेंगे।

ऑडिशन की तारीखें भी तय कर दी गई हैं:

  • 12 अप्रैल – आदिवासी हो समाज महासभा भवन, चाईबासा
  • 16 अप्रैल – जमशेदपुर

इसके अलावा चक्रधरपुर और ओडिशा में भी ऑडिशन आयोजित किए जाएंगे।

इतिहास को सिनेमा में लाने की कोशिश

विधायक दशरथ गागराई ने बताया कि 2024 में नागपुरी कलाकार पवन रॉय के गुवा गोलीकांड पर बने गाने से वे काफी प्रभावित हुए थे। उसी से प्रेरित होकर उन्होंने खरसावां गोलीकांड जैसे बड़े ऐतिहासिक विषय को फिल्म के रूप में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक प्रयास है। साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली कलाकारों को मंच देने का भी मकसद है।

राजनीति के साथ सांस्कृतिक पहचान

लगातार तीन बार विधायक चुने जा चुके दशरथ गागराई राजनीति के साथ-साथ सांस्कृतिक क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। वे खुद गीत लिखते हैं और गाते भी हैं। उनके घर में ही आधुनिक सुविधाओं से लैस एक म्यूजिक स्टूडियो तैयार किया गया है, जहां से कई एल्बम तैयार हो चुके हैं।

यह पहल न सिर्फ खरसावां गोलीकांड के इतिहास को जीवंत करेगी, बल्कि झारखंड की हो भाषा और स्थानीय प्रतिभाओं को भी एक नई पहचान दिलाने का काम करेगी

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