18 मई तक चुप रहेंगे, Radhakrishan Kishore के बयान से मची हलचल

चुनावी वादों पर अपनी ही सरकार को घेर रहे राधाकृष्ण किशोर

Radhakrishan Kishore ने एक बार फिर झारखंड की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। राज्य के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को पत्र लिखकर गरीब परिवारों को गैस सिलेंडर पर सब्सिडी देने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने 2024 विधानसभा चुनाव के दौरान गठबंधन द्वारा किए गए वादों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि “भरोसा बरकरार, फिर गठबंधन सरकार” और “सात वादे, पक्के इरादे” अभियान के तहत गरीब परिवारों को 450 रुपये में गैस सिलेंडर देने का वादा किया गया था।

JMM के प्रदर्शन के बीच आया पत्र: Radhakrishan Kishore

सबसे खास बात यह रही कि मंत्री का यह पत्र उस समय सामने आया, जब झारखंड मुक्ति मोर्चा खुद गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन कर रही थी। एक तरफ गठबंधन सरकार का प्रमुख दल महंगाई के खिलाफ आंदोलन कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ सरकार के भीतर से चुनावी वादों को याद दिलाने वाला पत्र सामने आने से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

लगातार बयानबाजी से बढ़ी बेचैनी: Radhakrishan Kishore

राधाकृष्ण किशोर पिछले कुछ दिनों से लगातार अपनी ही पार्टी और संगठन को लेकर बयान दे रहे हैं। इससे पहले उन्होंने कांग्रेस संगठन विस्तार और प्रदेश नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठाए थे। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि क्या झारखंड कांग्रेस के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा।

इरफान अंसारी और धीरज साहू ने की मुलाकात: Radhakrishan Kishore

सूत्रों के मुताबिक, इरफान अंसारी और पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज साहू ने हाल ही में राधाकृष्ण किशोर से मुलाकात की और उन्हें फिलहाल चुप रहने की सलाह दी। हालांकि बताया जा रहा है कि मंत्री ने साफ कहा है कि “18 मई तक हमारी चुप्पी रहेगी, फिर हमें कोई नहीं रोक सकता।”

क्या गठबंधन सरकार में सबकुछ ठीक है?

राधाकृष्ण किशोर के लगातार पत्र और बयान अब सिर्फ नाराजगी नहीं, बल्कि बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखे जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड की राजनीति में जब चिट्ठियों और सार्वजनिक बयानबाजी का दौर शुरू होता है, तो उसके पीछे अक्सर सत्ता और संगठन दोनों के समीकरण बदलते दिखाई देते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और गठबंधन सरकार इस बढ़ती अंदरूनी खींचतान को कैसे संभालती है।

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