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झारखंड में IFS अधिकारियों को सचिव पद क्यों नहीं मिलता? प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

जानिए सेवा नियम, अन्य राज्यों की व्यवस्था और इस मुद्दे से जुड़े प्रमुख पहलू।

झारखंड में IFS अधिकारियों को सचिव पद क्यों नहीं मिलता? प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

Ranchi: झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था में भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों को सचिव (Secretary) स्तर की जिम्मेदारी नहीं मिलने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। राज्य में अब तक अधिकांश IFS अधिकारियों को स्पेशल सेक्रेटरी (Special Secretary) तक ही सीमित रखा गया है, जबकि देश के कई अन्य राज्यों में IFS अधिकारी सचिव स्तर के पदों पर भी कार्य कर चुके हैं।

प्रशासनिक हलकों में इस व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल सेवा नियमों की बाध्यता है या फिर प्रशासनिक परंपरा का हिस्सा।

दूसरे राज्यों में IFS अधिकारियों को मिली बड़ी जिम्मेदारियां

प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि ओडिशा, मध्य प्रदेश, केरल और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में विभिन्न अवसरों पर IFS अधिकारियों को सचिव स्तर की जिम्मेदारियां दी गई हैं। ऐसे उदाहरण भी सामने आए हैं जहां IFS अधिकारी मुख्यमंत्री कार्यालय या महत्वपूर्ण विभागों में नीति निर्माण की भूमिका निभाते रहे हैं।

इसके विपरीत झारखंड में IFS अधिकारियों की नियुक्ति प्रायः स्पेशल सेक्रेटरी स्तर तक ही सीमित रही है।

क्या कहते हैं सेवा नियम?

भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) कैडर नियम, 1954 के तहत सामान्यतः सचिव स्तर के पद IAS कैडर पोस्ट माने जाते हैं। हालांकि विशेष परिस्थितियों में गैर-कैडर अधिकारियों की नियुक्ति का भी प्रावधान है।

नियमों के अनुसार—

  • यदि उपयुक्त IAS अधिकारी उपलब्ध नहीं हो तो गैर-कैडर अधिकारी को अस्थायी रूप से नियुक्त किया जा सकता है।
  • तीन महीने से अधिक की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार की अनुमति आवश्यक होती है।
  • छह महीने से अधिक की अवधि के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रक्रिया और सलाह का पालन करना होता है।

इसी प्रावधान को लेकर प्रशासनिक स्तर पर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आती रही हैं।

झारखंड में क्यों उठ रहे हैं सवाल?

राज्य में लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि अनुभवी IFS अधिकारियों को सचिव स्तर की जिम्मेदारियां नहीं मिल रही हैं। कुछ पूर्व अधिकारियों के नाम भी इस संदर्भ में लिए जाते रहे हैं, जिन्हें स्पेशल सेक्रेटरी के रूप में जिम्मेदारी मिली, लेकिन सचिव पद तक पदोन्नति या नियुक्ति नहीं हो सकी।

हालांकि इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक नीति या बयान सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि ऐसी नियुक्तियों को लेकर सरकार का दृष्टिकोण क्या है।

क्षमता बनाम कैडर पर बहस

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक शासन व्यवस्था में किसी अधिकारी की नियुक्ति केवल सेवा कैडर के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी प्रशासनिक क्षमता, अनुभव और विभागीय विशेषज्ञता को ध्यान में रखकर भी की जानी चाहिए।

दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि कैडर व्यवस्था प्रशासनिक संतुलन और सेवा संरचना बनाए रखने के लिए बनाई गई है, इसलिए नियुक्तियां निर्धारित नियमों के अनुरूप ही होनी चाहिए।

आगे क्या?

झारखंड में IFS अधिकारियों को सचिव स्तर पर जिम्मेदारी देने का विषय फिलहाल प्रशासनिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। यदि भविष्य में राज्य सरकार इस दिशा में कोई स्पष्ट नीति अपनाती है, तो इससे विभिन्न अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों की भूमिका और प्रशासनिक संरचना को लेकर नई चर्चा शुरू हो सकती है।

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