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बाबूलाल मरांडी का बड़ा सवाल: भ्रष्टाचार में IAS जेल गए, अब तक कोई IPS अधिकारी क्यों नहीं?

IAS की गिरफ्तारी पर बाबूलाल मरांडी ने उठाए सवाल, बोले- IPS अधिकारियों को ‘सात खून माफ’ क्यों?

बाबूलाल मरांडी का बड़ा सवाल- ‘आज तक कोई IPS अधिकारी जेल क्यों नहीं गया?’

Ranchi: झारखंड में भ्रष्टाचार और कथित पुलिस-माफिया गठजोड़ को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार और जांच एजेंसियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में कई IAS अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई और वे जेल गए, लेकिन अब तक किसी IPS अधिकारी के जेल जाने का मामला सामने क्यों नहीं आया।

बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सवाल उठाया कि अगर भ्रष्टाचार और सरकारी खजाने की लूट के मामलों में IAS अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है, तो पुलिस महकमे के वरिष्ठ अधिकारियों तक जांच की आंच क्यों नहीं पहुंचती।

‘IPS अधिकारियों को विशेष सुरक्षा कवच क्यों?’

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बनने के बाद भ्रष्टाचार के मामलों में कई वरिष्ठ IAS अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई हुई है। उनके मुताबिक, इससे यह साबित हुआ कि प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं।

लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य में अवैध खनन, जमीन के कारोबार, रंगदारी और संगठित अपराध जैसी गतिविधियों के बावजूद पुलिस विभाग के शीर्ष अधिकारियों की भूमिका की उसी गंभीरता से जांच क्यों नहीं होती।

अवैध खनन और अपराध नेटवर्क का उठाया मुद्दा

मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड में कोयला, बालू, पत्थर और लौह अयस्क के अवैध कारोबार के साथ-साथ जमीन से जुड़े मामलों और रंगदारी का नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है।

उन्होंने सवाल किया कि इतने बड़े स्तर पर चल रहे कथित अवैध कारोबार और संगठित अपराध बिना किसी प्रभावशाली संरक्षण के कैसे संचालित हो सकते हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

‘क्या माफिया नेटवर्क बिना IPS की मिलीभगत के चल सकता है?’

बाबूलाल मरांडी ने सवाल किया कि क्या झारखंड में संगठित अपराध और माफिया नेटवर्क इतना बड़ा हो सकता है, जबकि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच ही नहीं हो।

उन्होंने कहा कि यदि भ्रष्टाचार और अपराध के मामलों में IAS अधिकारियों पर कार्रवाई होती है, तो समान परिस्थितियों में IPS अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

‘IAS को सजा और IPS को सात खून माफ क्यों?’

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य में जो ईमानदार IAS और IPS अधिकारी हैं, उन्हें भी इस व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई और बदनामी IAS अधिकारियों के हिस्से आती है, तो IPS अधिकारियों को कथित तौर पर विशेष संरक्षण क्यों मिलता है।

मरांडी ने कहा कि यह किसी दल विशेष का मुद्दा नहीं, बल्कि कानून के समान अनुपालन और जवाबदेही का सवाल है। उन्होंने मांग की कि भ्रष्टाचार और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष और प्रभावी जांच होनी चाहिए।

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