झारखंड के गांवों में अब वैज्ञानिक तरीके से होगा कचरा प्रबंधन, ‘कचरे से कमाई’ और ‘कचरे से ऊर्जा’ मॉडल पर सरकार का फोकस

कचरे से कमाई’ और ‘कचरे से ऊर्जा’ मॉडल, MRF सेंटर, कम्पोस्टिंग और प्लास्टिक रीसाइक्लिंग पर सरकार का विशेष फोकस रहेगा।

झारखंड सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने की तैयारी में जुट गई है। राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में वैज्ञानिक ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली (Scientific Solid Waste Management) विकसित करने की दिशा में पहल शुरू कर दी गई है। इसी उद्देश्य से गुरुवार को रांची के होटल बीएनआर चाणक्य में राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें पेयजल एवं स्वच्छता तथा उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

‘कचरे से कमाई’ और ‘कचरे से ऊर्जा’ पर जोर

कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि अब कचरे को केवल गंदगी नहीं, बल्कि एक उपयोगी संसाधन के रूप में देखा जाएगा। सरकार का लक्ष्य ‘कचरे से कमाई’ (Waste to Wealth) और ‘कचरे से ऊर्जा’ (Waste to Energy) मॉडल को गांव-गांव तक पहुंचाना है, ताकि स्वच्छता के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकें।

हर ग्राम पंचायत में बनेगी वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था

सरकार की योजना के तहत राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में वैज्ञानिक तरीके से ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। इसके तहत—

सिंगल-यूज प्लास्टिक पर होगी सख्ती

मंत्री ने कहा कि सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रभावी रोक लगाने और लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कचरा प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

UNICEF देगा तकनीकी सहयोग

कार्यशाला में यूनिसेफ की भूमिका पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि UNICEF के तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और जिला स्तर पर मार्गदर्शन को और मजबूत किया जाए, ताकि राज्यभर में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू की जा सके।

ग्रामीण स्वच्छता और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का मानना है कि वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन प्रणाली लागू होने से न केवल गांवों की स्वच्छता में सुधार होगा, बल्कि जैविक खाद निर्माण, रीसाइक्लिंग और कचरा आधारित ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से ग्रामीण युवाओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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