लातेहार के गुरुजी बैजनाथ राम का संघर्ष और सफलता का सफर

झारखंड गठन के बाद राजनीति में एंट्री

लातेहार के ‘गुरुजी’ का राज्यसभा तक का सफर: शिक्षक से सांसद बने बैजनाथ राम

Ranchi: झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में जीत दर्ज करने वाले झामुमो नेता बैजनाथ राम का राजनीतिक सफर संघर्ष, धैर्य और लगातार मेहनत की मिसाल है। कभी लातेहार के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में बच्चों को पढ़ाने वाले बैजनाथ राम अब देश की सर्वोच्च विधायिका के उच्च सदन राज्यसभा में झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुंचने वाले बैजनाथ राम की कहानी एक साधारण शिक्षक से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचने की प्रेरक गाथा है।

गांव से शुरू हुआ सफर

लातेहार जिले के परसही गांव में वर्ष 1967 में जन्मे बैजनाथ राम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव और लातेहार में पूरी की। इसके बाद उन्होंने बनवारी साहू महाविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने करीब तीन वर्षों तक शिक्षक के रूप में सेवाएं दीं और स्थानीय स्तर पर ‘गुरुजी’ के नाम से पहचान बनाई।

झारखंड गठन के बाद राजनीति में एंट्री

साल 2000 में झारखंड राज्य गठन के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति का रास्ता चुना। उसी वर्ष हुए पहले विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के टिकट पर लातेहार से चुनाव लड़कर विधायक बने। राजनीति में उनकी मजबूत शुरुआत ने उन्हें राज्य सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिलाईं।

कई विभागों के मंत्री रहे

बैजनाथ राम ने अपने राजनीतिक जीवन में खेल, मद्य निषेध, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2005 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद वे दोबारा विधायक बने और शिक्षा मंत्री का दायित्व निभाया। हालांकि 2009 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और बाद के वर्षों में राजनीतिक चुनौतियां भी झेलनी पड़ीं।

जेएमएम में मिली नई पहचान

2019 में भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा का दामन थाम लिया। पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका और नेतृत्व के प्रति निष्ठा के कारण उन्हें लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रहीं। इसी का परिणाम रहा कि झामुमो नेतृत्व ने राज्यसभा चुनाव में उन पर भरोसा जताया।

राज्यसभा पहुंचकर बढ़ा कद

राज्यसभा चुनाव में जीत के साथ बैजनाथ राम ने अपने राजनीतिक जीवन का नया अध्याय शुरू किया है। उनकी जीत को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। अनुसूचित जाति समाज में मजबूत पकड़ रखने वाले बैजनाथ राम अब संसद में झारखंड के मुद्दों को मजबूती से उठाने की जिम्मेदारी निभाएंगे।

लातेहार की गलियों से दिल्ली के संसद भवन तक पहुंचने वाला यह सफर झारखंड की राजनीति में एक प्रेरक कहानी के रूप में देखा जा रहा है।

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