पश्चिम बंगाल की सियासत इस वक्त अपने चरम पर है, और इस चुनावी माहौल में अब झारखंड की राजनीति की गूंज भी साफ सुनाई देने लगी है। Kalpana Soren और हेमंत सोरेन ने मिलकर बंगाल के रण में एंट्री कर दी है और ममता बनर्जी के समर्थन में जोरदार प्रचार अभियान शुरू किया है।
रविवार को पश्चिम मेदिनीपुर के केशियारी और दांतन विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित जनसभाओं में दोनों नेताओं की मौजूदगी ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की ओर से स्टार प्रचारक के रूप में उतरीं कल्पना सोरेन ने मंच से दावा किया कि इस बार भी बंगाल में विकास और जनहित की राजनीति की जीत तय है।
बंगाल की जनता के साथ भावनात्मक जुड़ाव: Kalpana Soren
अपने संबोधन में कल्पना सोरेन ने बंगाल की जनता के संघर्ष और राजनीतिक जागरूकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि बंगाल की माटी ने हमेशा जनहित की राजनीति को प्राथमिकता दी है और इस बार भी जनता उसी सरकार को चुनेगी जिसने उनके अधिकारों की रक्षा की है।
केशियारी में उन्होंने उम्मीदवार श्रीरामजीबन मंडी के लिए वोट मांगे, जबकि दांतन में माणिक मैती के समर्थन में जनता से अपील की। उन्होंने कहा कि जनसभाओं में उमड़ी भीड़ साफ संकेत दे रही है कि जनता का भरोसा अभी भी ममता बनर्जी के नेतृत्व पर कायम है।
“बंगाल का भविष्य सुरक्षित हाथों में”: Kalpana Soren
कल्पना सोरेन ने साफ शब्दों में कहा कि बंगाल और झारखंड का रिश्ता सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि साझा संघर्षों और सामाजिक न्याय की लड़ाई से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने हमेशा आम लोगों के हित में काम किया है और यही वजह है कि जनता एक बार फिर उसे सत्ता में लाने का मन बना चुकी है।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि नफरत और विभाजन की राजनीति ज्यादा दिन नहीं टिकती। बंगाल की जनता विकास, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर वोट करती है, और इस बार भी वही मुद्दे निर्णायक होंगे।
झारखंड-बंगाल का राजनीतिक कनेक्शन: Kalpana Soren
हेमंत सोरेन की मौजूदगी ने इस प्रचार को और वजन दिया। यह पहली बार नहीं है जब झारखंड की राजनीति का असर बंगाल के चुनाव में दिख रहा है, लेकिन इस बार JMM की सक्रिय भागीदारी इसे खास बना रही है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आदिवासी और सीमावर्ती इलाकों में JMM का प्रभाव तृणमूल कांग्रेस को सीधा फायदा पहुंचा सकता है। बंगाल के इस चुनावी रण में अब लड़ाई सिर्फ स्थानीय नहीं रही, बल्कि पड़ोसी राज्यों की राजनीति भी इसमें अहम भूमिका निभा रही है। कल्पना सोरेन और हेमंत सोरेन की सक्रियता ने साफ कर दिया है कि यह चुनाव अब राष्ट्रीय स्तर की रणनीति का हिस्सा बन चुका है और ममता बनर्जी के लिए यह समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है।
