झारखंड में ‘पलाश शहद’ की एंट्री, JSLPS ने लॉन्च की नई बाजार श्रृंखला; हजारों महिलाओं को मिलेगा रोजगार
रांची: झारखंड में ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की गई है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) ने राज्य में ‘पलाश शहद’ बाजार श्रृंखला का शुभारंभ किया है। रांची जिले के इटकी प्रखंड स्थित लुपुंग गांव में आयोजित कार्यक्रम में राज्य की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने पलाश शहद की तीन नई वैराइटी को बाजार में लॉन्च किया।
बाजार में अब मेलिफेरा हनी (Mellifera Honey), सेराना प्रीमियम हनी (Serena Premium Honey) और फॉरेस्ट हनी (Forest Honey) के नाम से शहद उपलब्ध होगा। इस अवसर पर JSLPS के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (CEO) अनन्य मित्तल भी उपस्थित रहे।
मधुमक्खी पालन महिलाओं के लिए बेहतर आजीविका का माध्यम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखंड के जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार होने वाला प्राकृतिक शहद अपनी शुद्धता और गुणवत्ता के लिए विशेष पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि आज बाजार में मिलावटी उत्पादों की बढ़ती संख्या के बीच शुद्ध शहद की मांग लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि कृषि के साथ-साथ मधुमक्खी पालन ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है। इससे न केवल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी, बल्कि पलायन की समस्या को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से महिलाओं को मधुमक्खी पालन के लिए विशेष प्रशिक्षण और बी बॉक्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
9 हजार महिलाओं को जोड़ने की योजना
JSLPS के CEO अनन्य मित्तल ने कहा कि मधुमक्खी पालन से जुड़ी महिलाओं का उत्साह काफी प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में इस परियोजना से 9 हजार महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा शहद आधारित अन्य उत्पादों के निर्माण और विपणन की भी योजना तैयार की जा रही है।
उन्होंने कहा कि यह पहल केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
4 जिलों के 10 प्रखंडों में चल रहा है अभियान
वर्तमान में राज्य के रांची, खूंटी, सिमडेगा और लातेहार जिलों के 10 प्रखंडों में महिलाओं को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण देकर शहद उत्पादन से जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक महिला को विभाग की ओर से दो-दो मधुमक्खी बी बॉक्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
झारखंड मधु आजीविका किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड (FPO) के अनुसार, 29 अप्रैल से 31 मई 2026 के बीच 500 बी बॉक्स के माध्यम से लगभग 1 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन किया जा चुका है।
13 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य
झारखंड मधु आजीविका किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 13 करोड़ रुपये के व्यवसायिक लेन-देन का लक्ष्य निर्धारित किया है। परियोजना के तहत गुणवत्ता, वैज्ञानिक प्रबंधन और प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि झारखंड का शहद राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सके।
ग्रामीण विकास विभाग का मानना है कि यह पहल आने वाले वर्षों में राज्य में ‘हनी क्रांति’ की मजबूत नींव साबित होगी और हजारों ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को नई मजबूती देगी।
