
राज्यसभा चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस और राजद में तकरार, वोटिंग को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज
Ranchi: झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद महागठबंधन के भीतर सियासी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रभारी के. राजू द्वारा गठबंधन सहयोगियों पर लगाए गए आरोपों के बाद राजद ने पलटवार करते हुए कांग्रेस को आत्ममंथन की सलाह दी है।
कांग्रेस ने सहयोगी दलों पर उठाए सवाल
राज्यसभा चुनाव परिणाम आने के बाद झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने कहा था कि यदि गठबंधन के सभी सहयोगी दल पूरी ईमानदारी से साथ खड़े रहते तो परिणाम अलग हो सकते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि राजद और भाकपा माले के कुछ विधायकों ने अपेक्षित समर्थन नहीं दिया, जिससे कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा।
राजद का जवाब: हमारे सभी विधायक साथ थे
कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए राजद के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव ने रांची में प्रेस वार्ता की। उन्होंने दावा किया कि राजद के सभी चार विधायकों ने INDIA गठबंधन के उम्मीदवार प्रणव झा के पक्ष में मतदान किया।
भोला यादव ने कहा कि वह स्वयं चुनाव प्रक्रिया के दौरान पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद थे और चारों विधायकों ने उन्हें अपना वोट दिखाया था। उन्होंने कहा कि “मेरी नजर धोखा नहीं खा सकती। कांग्रेस को पहले अपने भीतर झांकना चाहिए और आत्ममंथन करना चाहिए।”
के. राजू ने कांग्रेस विधायकों का जताया आभार
वहीं कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि कांग्रेस के सभी 16 विधायकों ने पार्टी उम्मीदवार प्रणव झा के पक्ष में मतदान किया। उन्होंने कहा कि पोलिंग एजेंट होने के नाते उन्होंने हर वोट को बैलेट बॉक्स में डाले जाने से पहले देखा था।
उन्होंने कांग्रेस विधायकों की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी दबाव या प्रलोभन से दूर रहकर पार्टी उम्मीदवार का समर्थन किया।
महागठबंधन में बढ़ सकती है तल्खी
राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद जिस तरह सहयोगी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ है, उसने महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर गठबंधन के भीतर और मंथन हो सकता है।
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की हार ने न केवल पार्टी को झटका दिया है, बल्कि गठबंधन की अंदरूनी स्थिति को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि महागठबंधन के सहयोगी दल इस विवाद को किस तरह सुलझाते हैं।



