HeadlinesJharkhandStatesTrending

मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफर के बाद फिर उसी पोस्टिंग पर वापसी,

सरकारी दस्तावेजों ने खड़े किए कई सवाल

पलामू का मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल यानी एमएमसीएच… जहां इलाज के साथ-साथ अब कुछ प्रशासनिक निर्णय भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।

हमारे पास मौजूद सरकारी दस्तावेज दो कर्मचारियों से जुड़े ऐसे मामलों की ओर इशारा करते हैं, जिनमें स्थानांतरण के बाद फिर उसी संस्थान में पदस्थापना हुई।

पहला मामला – मोहम्मद शाहिद अली

दस्तावेजों के अनुसार 24 जून 2024 को उपायुक्त की स्वीकृति के बाद लिपिक मोहम्मद शाहिद अली का स्थानांतरण एमएमसीएच से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरिहरगंज किया गया।

उपलब्ध पत्राचार के मुताबिक लंबे समय तक उन्होंने नए पदस्थापन स्थल पर योगदान नहीं दिया। वहीं एमएमसीएच से विरमित होने के बाद कार्यालय का प्रभार भी समय पर नहीं सौंपा गया।

तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक ने इस संबंध में कई पत्र लिखकर कार्रवाई का अनुरोध किया। सिविल सर्जन कार्यालय को भी जानकारी भेजी गई।

दस्तावेज बताते हैं कि 2 मार्च 2026 को प्रभार सौंपे जाने की सूचना दी गई और 5 मार्च 2026 को सिविल सर्जन कार्यालय से मोहम्मद शाहिद अली की फिर से एमएमसीएच में पदस्थापना का आदेश जारी हो गया।


दूसरा मामला – धर्मेन्द्र

दूसरा मामला लेखा लिपिक धर्मेन्द्र से जुड़ा है।

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय कुमार ने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर उनके कार्य निष्पादन पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

पत्र में कार्य के प्रति लापरवाही और वित्तीय कार्यों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने का उल्लेख करते हुए उनके स्थानांतरण की अनुशंसा की गई थी।

इसके बाद उनका स्थानांतरण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चैनपुर कर दिया गया।

हालांकि बाद के पत्राचार से पता चलता है कि उन्हें दोबारा एमएमसीएच लाने का अनुरोध भी किया गया।

दस्तावेजों के अनुसार सिविल सर्जन स्तर पर यह अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया, लेकिन बाद में मामला राज्य स्तर तक पहुंचा और 31 जुलाई 2026 को धर्मेन्द्र की फिर से एमएमसीएच में पदस्थापना का आदेश जारी हुआ।


अब उठ रहे हैं कई सवाल

इन दस्तावेजों के आधार पर कई प्रश्न सामने आते हैं—

  • जिस कर्मचारी के स्थानांतरण की अनुशंसा की गई, उसे दोबारा उसी संस्थान में क्यों लाया गया?
  • स्थानांतरण आदेश का समय पर पालन नहीं होने के बावजूद विभागीय कार्रवाई हुई या नहीं?
  • क्या इन दोनों मामलों में कोई विशेष प्रशासनिक आवश्यकता थी?
  • क्या संबंधित अधिकारियों ने इन निर्णयों के पीछे पर्याप्त कारण दर्ज किए हैं?

संबंधित पक्ष का जवाब

इस मामले में मोहम्मद शाहिद अली का कहना है कि उन्होंने प्रभार सौंपने के बाद ही नई पदस्थापना प्राप्त की।

वहीं चिकित्सा अधीक्षक, सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग का विस्तृत पक्ष भी इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण है। उनका जवाब प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित और प्रसारित किया जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button