पटना: बिहार में सरकारी दफ्तरों की कार्यसंस्कृति सुधारने के लिए सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। Samrat Choudhary के नेतृत्व में अब समय की पाबंदी अनिवार्य कर दी गई है। मुख्य सचिव Pratyaya Amrit ने सभी विभागों को साफ निर्देश दिया है कि अब दफ्तरों में देर से आने और लापरवाही पर सीधी कार्रवाई होगी।
देर से आए तो सीधे वेतन पर असर: Samrat Choudhary
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है
- समय पर कार्यालय नहीं पहुंचने पर वेतन कटौती होगी
- अगर कर्मचारी के अवकाश खाते में छुट्टी नहीं बची, तो उस समय का पैसा काट लिया जाएगा
यानी अब लेटलतीफी सिर्फ चेतावनी नहीं, सीधा आर्थिक नुकसान बनेगी।
उपस्थिति के आधार पर ही बनेगा वेतन: Samrat Choudhary
- सभी विभागों को निर्देश: सैलरी बिल सिर्फ उपस्थिति रजिस्टर/बायोमेट्रिक डेटा के आधार पर बने
- गड़बड़ी होने पर संबंधित अधिकारी भी जिम्मेदार होंगे
औचक निरीक्षण से बढ़ेगी सख्ती: Samrat Choudhary
- विभागों और जिलों में सरप्राइज चेकिंग होगी
- अनुपस्थित या लापरवाह कर्मचारियों पर तुरंत कार्रवाई
तय किया गया नया ऑफिस टाइम
पांच दिन कार्य सप्ताह वाले कार्यालय
- सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक
- लंच ब्रेक: 1:00 से 2:00 बजे
महिला कर्मचारियों के लिए
- सुबह 9:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक
क्षेत्रीय कार्यालय (6 दिन):
सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक
- सर्दियों में: 10:30 बजे से 5:00 बजे
बायोमेट्रिक सिस्टम पर फोकस: Samrat Choudhary
- 2022 से लागू बायोमेट्रिक सिस्टम को अब और सख्ती से लागू किया जाएगा
- हर कर्मचारी की उपस्थिति डिजिटल रूप से दर्ज होगी
क्यों जरूरी हुआ यह फैसला?
सरकार का मानना है कि:
- लेटलतीफी से कामकाज प्रभावित होता है
- जनता को सेवाएं समय पर नहीं मिलती
- अनुशासन से ही प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी
क्या संकेत मिलते हैं?
बिहार में अब वर्क कल्चर सुधारने की बड़ी पहल शुरू हो चुकी हैI सरकारी कर्मचारियों के लिए यह साफ संदेश है “समय पर काम, वरना वेतन पर वारI
