
राजधानी रांची के बहुचर्चित RIMS लैंड स्कैम मामले में आरोपी सुमित्रा बड़ाईक को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया है।
यह मामला रिम्स की अधिग्रहित सरकारी जमीन के कथित फर्जीवाड़े से जुड़ा है, जिसकी जांच ACB कर रही है।
फर्जी वंशावली के आधार पर जमीन बेचने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, सुमित्रा बड़ाईक पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से फर्जी वंशावली दस्तावेजों के आधार पर रिम्स की लगभग 9.65 एकड़ अधिग्रहित सरकारी जमीन को अवैध तरीके से बिल्डरों के नाम बेच दिया। आरोप है कि इस जमीन पर बाद में मकान और अपार्टमेंट का निर्माण भी किया गया।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद हुई कार्रवाई
इस मामले में पहले झारखंड हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद संबंधित निर्माण को अवैध घोषित किया गया था। इसके बाद प्रशासन ने कई अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई भी की। जांच के दौरान बिल्डरों और कुछ राजस्व कर्मचारियों की कथित मिलीभगत सामने आने की बात भी जांच एजेंसियों ने कही है।
कई आरोपी पहले से जेल में
रिम्स लैंड स्कैम मामले में पहले ही कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और वे न्यायिक हिरासत में हैं। वहीं, सुमित्रा बड़ाईक को अग्रिम जमानत देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया है कि उन्हें ACB की जांच में पूरा सहयोग करना होगा।



