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Radhakrishna Koshore बने झारखंड राजनीति के ‘गूगल मैप’, हर दल का अनुभव बना चर्चा का विषय

राजद से कांग्रेस तक, Radhakrishna Koshore का राजनीतिक सफर फिर चर्चा में

Radhakrishna Koshore इन दिनों झारखंड की राजनीति में लगातार चर्चा के केंद्र बने हुए हैं। खास बात यह है कि उनके निशाने पर विपक्ष नहीं, बल्कि उनकी अपनी पार्टी और गठबंधन सरकार दिखाई दे रही है। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को राजनीतिक गलियारों में ऐसे नेता के तौर पर देखा जाता है, जिन्होंने अलग-अलग दलों में रहकर लंबा राजनीतिक अनुभव हासिल किया है। यही वजह है कि उन्हें अब “झारखंड राजनीति का गूगल मैप” कहा जा रहा है।

कई दलों में निभा चुके हैं भूमिका: Radhakrishna Koshore 

राधाकृष्ण किशोर का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। उन्होंने समय-समय पर राष्ट्रीय जनता दल, आजसू पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, समता पार्टी और अब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ राजनीति की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अलग-अलग विचारधाराओं और दलों में काम करने के कारण उन्हें सत्ता और संगठन दोनों की गहरी समझ है।

अपनी ही सरकार पर सवाल: Radhakrishna Koshore 

हाल के दिनों में राधाकृष्ण किशोर लगातार अपनी ही सरकार की नीतियों और संगठनात्मक फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को पत्र लिखकर गैस सिलेंडर सब्सिडी योजना पर भी सुझाव दिया था। चुनाव के दौरान 450 रुपये में सिलेंडर देने के वादे के बजाय उन्होंने 200 रुपये की सब्सिडी देने का सुझाव दिया, ताकि सरकार पर वित्तीय बोझ कम हो सके।

कांग्रेस संगठन पर भी उठाए सवाल

राधाकृष्ण किशोर ने कांग्रेस संगठन के विस्तार को लेकर भी नाराजगी जताई थी। उन्होंने प्रदेश संगठन को “जंबो जेट” तक कह दिया था, जिसके बाद पार्टी के भीतर बयानबाजी और राजनीतिक खींचतान तेज हो गई। उनके लगातार बयानों से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या झारखंड कांग्रेस और गठबंधन सरकार के भीतर सबकुछ ठीक चल रहा है।

‘कुर्सी’ छोड़ने को तैयार नहीं?

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि सरकार और पार्टी से असहमति के बावजूद राधाकृष्ण किशोर मंत्री पद छोड़ने के मूड में नहीं हैं। विरोधियों का कहना है कि अगर किसी नेता को अपनी ही सरकार की नीतियों से इतनी दिक्कत है, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। हालांकि राधाकृष्ण किशोर फिलहाल अपनी राजनीतिक रणनीति और बयानों के जरिए सरकार और संगठन दोनों पर दबाव बनाते नजर आ रहे हैं। झारखंड की राजनीति में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके अगले राजनीतिक कदम का असर गठबंधन और कांग्रेस संगठन पर कितना पड़ता हैI

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