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धनबाद में 1.58 करोड़ का विद्युत शवदाहगृह बंद, 65 हजार के बिल ने रोक दी सेवा

कोरोना के बाद बना आधुनिक शवदाहगृह अब खुद गिन रहा अंतिम सांसें

धनबाद में 1.58 करोड़ का विद्युत शवदाहगृह बना कबाड़, 65 हजार के बिल और खराब हीटर से 8 महीने से बंद

धनबाद नगर निगम की लापरवाही ने करोड़ों रुपए की सरकारी योजना को लगभग कबाड़ में बदल दिया है। मोहलबनी घाट पर करीब 1.58 करोड़ रुपए की लागत से बना आधुनिक विद्युत शवदाहगृह पिछले 8 महीनों से बंद पड़ा है।

हैरानी की बात यह है कि महज 65 हजार रुपए के बकाया बिजली बिल और एक खराब हीटर के कारण यह पूरा प्रोजेक्ट ठप हो गया है।

दिसंबर 2023 में हुआ था शुभारंभ

इस आधुनिक विद्युत शवदाहगृह की शुरुआत दिसंबर 2023 में एक निर्धन महिला के अंतिम संस्कार के साथ हुई थी। शुरुआती दौर में यहां करीब 25 से 30 शवों का दाह-संस्कार किया गया।

लेकिन महज दो महीने बाद लो-वोल्टेज की समस्या के कारण इसका हीटर फुंक गया। इसके बाद से यहां एक भी शव का दाह-संस्कार नहीं हो सका।

सूख गया पार्क, बंद पड़ी सुविधाएं

देखरेख के अभाव में शवदाहगृह परिसर में बना पार्क और पौधे भी सूख चुके हैं। करोड़ों की लागत से तैयार आधुनिक व्यवस्था अब वीरान नजर आती है।

यहां तैनात कर्मचारी अब भी इसके दोबारा चालू होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

कोरोना काल के बाद बनी थी योजना

कोरोना महामारी के दौरान अंतिम संस्कार की व्यवस्था को लेकर सामने आई समस्याओं के बाद जिला प्रशासन ने इस परियोजना को प्राथमिकता दी थी।

इसके लिए 500 KVA का ट्रांसफार्मर और बैकअप के तौर पर 200 KVA का जनरेटर भी लगाया गया था। लेकिन रखरखाव के अभाव में पूरी व्यवस्था बेकार होती जा रही है।

कंपनी को कई बार दी गई चेतावनी

जानकारी के अनुसार, दिल्ली की सप्लायर कंपनी एसडी इंटरप्राइजेज को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

करोड़ों खर्च, लेकिन सुविधा ठप

अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या करोड़ों रुपए की सरकारी राशि सिर्फ दिखावे और कबाड़ बनने के लिए खर्च की गई थी?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही बॉयलर और तकनीकी खराबियों को ठीक नहीं कराया गया, तो यह आधुनिक विद्युत शवदाहगृह भी 1990 के दशक में बने पुराने शवदाहगृह की तरह इतिहास बनकर रह जाएगा।

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