HeadlinesJharkhand

एमएमसीएच से जारी जन्म प्रमाण पत्र पर उठे सवाल, अस्पताल रिकॉर्ड में नहीं मिला जन्म का विवरण

रिपोर्ट : नितेश तिवारी

मेदिनीनगर/समाचार वाला : पलामू में कथित फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। उपलब्ध दस्तावेज़ों और स्थानीय सूत्रों के आधार पर सामने आए एक नए मामले में मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमएमसीएच) से जारी जन्म प्रमाण पत्र की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह जन्म पंजीकरण प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।

आरोप है कि 22 जून 2026 को एमएमसीएच से आरती कुमारी (पिता– जितेंद्र कुमार सिंह, माता– शीला कुमारी) के नाम से जन्म प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसमें जन्म तिथि 23 जनवरी 2020 अंकित है। हालांकि, दस्तावेज़ों की पड़ताल के दौरान अस्पताल के संबंधित जन्म रजिस्टर में उक्त तिथि पर शीला कुमारी के नाम से प्रसव का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलने का दावा किया गया है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

जन्म प्रमाण पत्र

इस संबंध में एमएमसीएच के अधीक्षक डॉ. अजय कुमार से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जुलाई 2025 में मेदिनीनगर नगर निगम कार्यालय के बाहर उपायुक्त के कथित फर्जी हस्ताक्षर से जन्म प्रमाण पत्र बनाए जाने के आरोप में एक दुकान को सील किया गया था। उस मामले में बड़ी संख्या में संदिग्ध जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने की बात सामने आई थी।

इसके बाद अक्टूबर 2025 में भी एमएमसीएच से जारी कई संदिग्ध जन्म प्रमाण पत्रों को लेकर जांच शुरू की गई थी। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के क्षेत्रीय कार्यालय, रांची तथा सिविल सर्जन, पलामू के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था। समिति में डॉ. जितेंद्र सिंह, डॉ. अब्दुल अहद और डॉ. उदय सिंह को शामिल किया गया था, जबकि प्रसव कक्ष प्रभारी नीलम बाखला को जांच में सहयोग का निर्देश दिया गया था।

बताया जाता है कि उस समय करीब 9 से 10 संदिग्ध जन्म प्रमाण पत्रों की जांच की गई थी। इनमें बसंती टुडू, एमडी अयान अंसारी, स्वाति मुर्मू, श्रद्धा कुमारी, आयुष मंडल, अब्दुल आलम, एमडी शादिल अंसारी, करण करमाकर और शबनम खातून सहित अन्य नाम शामिल थे। इनमें से कई मामलों में धनबाद और गिरिडीह जिले के पते दर्ज थे। हालांकि, उस जांच की अंतिम रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

स्पष्टीकरण लेटर

लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच अस्पताल की कार्यप्रणाली और जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का विस्तृत पक्ष भी उपलब्ध नहीं हो सका है।

यदि वर्तमान मामले में लगाए गए आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के साथ अब तक जारी संदिग्ध जन्म प्रमाण पत्रों का व्यापक सत्यापन आवश्यक होगा। वहीं, यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि आम लोगों का भरोसा सरकारी व्यवस्था पर बना रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button