
बेटे से मिलने की आस में साड़ी पहनकर 1600 मीटर दौड़ी प्रियंका, होमगार्ड बनकर खुद की जिंदगी संवारने की कोशिश
हजारीबाग: साड़ी पहनकर 1600 मीटर की दौड़, आंखों में बेटे से मिलने की उम्मीद और जिंदगी को दोबारा संवारने का संकल्प। हजारीबाग जिले के इचाक की रहने वाली प्रियंका की कहानी संघर्ष और आत्मनिर्भर बनने की कोशिश से जुड़ी है। वह इन दिनों रामगढ़ में होमगार्ड भर्ती की तैयारी कर रही हैं। उनके मुताबिक, नौकरी हासिल करना उनके लिए केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से मजबूत बनने और अपने बेटे से मिलने की कोशिश जारी रखने का रास्ता भी है।
प्रियंका की कहानी उस समय सामने आई, जब हजारीबाग डिफेंस एकेडमी की ओर से सत्तू लंबा स्टेडियम में 1600 मीटर दौड़ का ट्रायल आयोजित किया गया। प्रियंका साड़ी पहनकर ही ट्रायल में पहुंच गईं। उनके इस प्रयास ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। बताया गया कि उन्होंने दौड़ में भी अच्छा प्रदर्शन किया।
चार साल से पति से अलग रहने का दावा
प्रियंका का दावा है कि उनके पति करीब चार साल पहले उन्हें छोड़कर अलग हो गए और उनका बेटा अपने साथ रख लिया। प्रियंका का आरोप है कि जब वह बच्चे से मिलने ससुराल जाती हैं, तो उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज और मारपीट की जाती है। उनका कहना है कि उन्हें कई बार बच्चे से मिले बिना ही वापस लौटना पड़ा।
प्रियंका ने यह भी आरोप लगाया कि बच्चे को बताया गया है कि उसकी मां की मृत्यु हो चुकी है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में दूसरे पक्ष का बयान भी सामने आना बाकी है।
प्रियंका के मुताबिक, उनके पति ने अदालत में तलाक का मामला भी दायर किया है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें कानूनी प्रक्रिया में आगे बढ़ने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
साड़ी पहनकर दौड़ने पहुंचीं प्रियंका
प्रियंका की कहानी उस वक्त चर्चा में आई, जब वह सत्तू लंबा स्टेडियम में आयोजित 1600 मीटर दौड़ के ट्रायल में साड़ी पहनकर शामिल हुईं। सीमित संसाधनों और निजी परेशानियों के बावजूद भर्ती की तैयारी करने का उनका प्रयास लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गया।
ट्रायल के दौरान हजारीबाग डिफेंस एकेडमी के कोच राहुल यादव ने उनसे बातचीत की। प्रियंका की पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने उनकी मदद करने का फैसला लिया।
कोच राहुल यादव ने मुफ्त ट्रेनिंग किट दी
हजारीबाग डिफेंस एकेडमी के कोच राहुल यादव ने प्रियंका को अपनी ओर से निःशुल्क ट्रेनिंग किट उपलब्ध कराई है। साथ ही उन्हें होमगार्ड भर्ती की शारीरिक परीक्षा की तैयारी के लिए मुफ्त प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
राहुल यादव के मुताबिक, आर्थिक तंगी या दूसरी परेशानियों के कारण जो अभ्यर्थी शारीरिक परीक्षा की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं, वे उनसे संपर्क कर सकते हैं। उनका प्रयास है कि जरूरतमंद अभ्यर्थियों को निःशुल्क प्रशिक्षण देकर आगे बढ़ने का अवसर मिले।
प्रियंका के लिए होमगार्ड की नौकरी क्यों है अहम?
प्रियंका का कहना है कि अगर उनका चयन होमगार्ड में हो जाता है, तो वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी। इससे उन्हें अपने जीवन को बेहतर बनाने और बेटे से मिलने की कोशिश जारी रखने में मदद मिल सकती है।
उनके लिए भर्ती की तैयारी केवल नौकरी पाने की कवायद नहीं, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों से निकलकर अपने पैरों पर खड़े होने का प्रयास भी है।
बच्चे का हित और निष्पक्ष जांच भी जरूरी
प्रियंका की कहानी में एक ओर मां-बेटे के अलगाव का दर्द है, तो दूसरी ओर रोजगार और आत्मनिर्भरता की तलाश। हालांकि, पारिवारिक विवाद से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच और दूसरे पक्ष का बयान सामने आना भी जरूरी है।
ऐसे मामलों में बच्चे के सर्वोत्तम हित, उसकी सुरक्षा और दोनों अभिभावकों से जुड़े कानूनी अधिकारों पर फैसला संबंधित तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।
फिलहाल, प्रियंका होमगार्ड भर्ती के लिए मेहनत कर रही हैं। उनकी उम्मीद है कि रोजगार मिलने से वह अपनी जिंदगी को नई दिशा दे सकेंगी और अपने बेटे से मिलने की कोशिश में आगे बढ़ पाएंगी।



