
Jharkhand Anti-Drug Campaign: झारखंड में नशे के खिलाफ गांव-गांव चलेगा अभियान, पंचायतों को जोड़ने की तैयारी
रांची: झारखंड में नशे की समस्या से निपटने के लिए जागरूकता अभियान को गांवों और शहरी बस्तियों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत पंचायत प्रतिनिधियों, परिवारों, सहिया, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वयं सहायता समूहों और युवा संगठनों को अभियान से जोड़ने पर जोर दिया गया है। साथ ही नशे की शुरुआती अवस्था में प्रभावित लोगों की पहचान, परामर्श, उपचार और पुनर्वास तक पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत बताई गई है।
इस रणनीति पर विचार-विमर्श के लिए महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की ओर से राज्यस्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के निर्देश पर आयोजित कार्यशाला का विषय ‘रीइमैजिनिंग प्रिवेंशन एंड ड्रग डिमांड रिडक्शन इन इंडिया’ था।
नशे की रोकथाम में समाज की भागीदारी पर जोर
कार्यशाला में विशेषज्ञों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने नशीले पदार्थों की मांग कम करने तथा रोकथाम के लिए जमीनी स्तर पर समन्वित व्यवस्था विकसित करने पर चर्चा की।
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तथा महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने कहा कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। इसका असर युवाओं, परिवारों और समाज के भविष्य पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता का आकलन इस आधार पर किया जाना चाहिए कि कितने लोगों को नशे से बचाने में मदद मिली और उनके जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया।
शुरुआती पहचान से उपचार और पुनर्वास तक की तैयारी
कार्यशाला में नशे की समस्या सामने आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय शुरुआती स्तर पर ही रोकथाम के प्रयास करने की आवश्यकता बताई गई। इसके लिए परिवार और समुदाय की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया।
प्रतिभागियों के अनुसार, सही समय पर जानकारी, परामर्श और सहयोग मिलने से युवाओं को नशे से दूर रखने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही नशे की समस्या से प्रभावित लोगों को उपचार, पुनर्वास और समाज में दोबारा सामान्य जीवन शुरू करने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
पंचायतों और कई विभागों के बीच बनेगा समन्वय
कार्यशाला में जिला, प्रखंड और ग्राम स्तर पर साझा कार्ययोजना तैयार करने की जरूरत बताई गई। इसका उद्देश्य जागरूकता, परामर्श, उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्समायोजन से जुड़ी सेवाओं को एक-दूसरे से जोड़ना है।
इस चर्चा में पंचायती राज, नगर विकास, गृह विभाग के नारकोटिक्स प्रकोष्ठ, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, आईसीपीएस और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी समेत कई विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
अभियान में स्थानीय संस्थाओं और समुदायों की भागीदारी बढ़ाने से नशे की रोकथाम से जुड़ी जानकारी अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
नशामुक्ति हेल्पलाइन 14446 के प्रचार पर जोर
कार्यशाला में नशामुक्ति से संबंधित सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 14446 और उपलब्ध परामर्श, उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने पर भी चर्चा हुई।
कार्यशाला में तैयार की गई कार्ययोजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को भेजी जाएगी। इसका उद्देश्य विभिन्न विभागों के प्रयासों को एक मंच पर लाकर नशे की रोकथाम और प्रभावित लोगों की सहायता की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
हालांकि, गांवों और शहरी बस्तियों में अभियान कब और किस चरण में लागू होगा, इसकी विस्तृत समयसीमा उपलब्ध जानकारी में नहीं बताई गई है।



