“JPSC में ‘प्रतिभा सेतु’ लागू हो: संजय मेहता ने CM Hemant Soren को लिखा पत्र”

चंद अंकों से चूकने वालों को मिले मौका, ‘प्रतिभा सेतु’ की मांग तेज”

रांची | 20 अप्रैल 2026: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक नई पहल की मांग उठी है। आजसू के महासचिव और हजारीबाग लोकसभा के पूर्व प्रत्याशी संजय मेहता ने मुख्यमंत्री Hemant Soren को पत्र लिखकर “जेपीएससी प्रतिभा सेतु” बनाने का सुझाव दिया है।

“युवाओं की प्रतिभा को मिले दूसरा मौका”: Hemant Soren

संजय मेहता ने अपने पत्र में कहा कि जेपीएससी की परीक्षाओं में कई ऐसे प्रतिभाशाली अभ्यर्थी होते हैं, जो प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार तक पहुंचते हैं, लेकिन कुछ अंकों से अंतिम मेरिट सूची में जगह नहीं बना पाते। ऐसे अभ्यर्थियों के लिए एक वैकल्पिक मंच तैयार किया जाना चाहिए, ताकि उनकी प्रतिभा का बेहतर उपयोग हो सके।

UPSC मॉडल पर आधारित सुझाव: Hemant Soren

उन्होंने अपने प्रस्ताव में संघ लोक सेवा आयोग की “प्रतिभा सेतु” पहल का उदाहरण दिया। यह पहल 2018 में शुरू हुई थी, जिसके तहत उन अभ्यर्थियों का डेटा सार्वजनिक किया जाता है जो सभी चरणों को पार कर चुके होते हैं, लेकिन अंतिम चयन में पीछे रह जाते हैं। इस डेटा को सरकारी और निजी संस्थानों के साथ साझा किया जाता है, जिससे उन्हें रोजगार के नए अवसर मिलते हैं।

झारखंड में भी बने ऐसा प्लेटफॉर्म: Hemant Soren

संजय मेहता ने कहा कि इसी तर्ज पर “जेपीएससी प्रतिभा सेतु” बनाया जाए, जिसमें योग्य अभ्यर्थियों का डेटाबेस तैयार कर उनकी सहमति से सार्वजनिक किया जाए। इस प्लेटफॉर्म के जरिए उन्हें राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों में अवसर दिए जा सकते हैं।

“मानसिक दबाव कम करने की जरूरत”

उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम चयन से चूकने वाले अभ्यर्थी अक्सर मानसिक दबाव में आ जाते हैं। ऐसे में यह पहल उनके आत्मविश्वास को बनाए रखने और उन्हें नया अवसर देने में मददगार साबित हो सकती है।

“राज्य के विकास में होगा उपयोग”

संजय मेहता के अनुसार, यह कदम न सिर्फ युवाओं के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि झारखंड सरकार को भी प्रशिक्षित और योग्य मानव संसाधन मिलेगा, जो राज्य के प्रशासनिक और विकास कार्यों में योगदान दे सकेगा।

“जेपीएससी प्रतिभा सेतु” जैसी पहल झारखंड के युवाओं के लिए एक नई उम्मीद बन सकती है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस सुझाव पर कितना गंभीरता से विचार करती है और इसे जमीन पर उतारने के लिए क्या कदम उठाती है।

 

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