HeadlinesJharkhandStatesTrending

खनिज कानून संशोधन पर प्रदीप यादव का हमला, बोले- राज्य के अधिकारों पर सीधा हमला, कानून वापस ले केंद्र

खनिज कानून संशोधन काला कानून’, प्रदीप यादव ने केंद्र से की वापसी की मांग

खनिज कानून में संशोधन पर प्रदीप यादव का हमला, बोले- ‘राज्य के अधिकारों पर सीधा हमला, कानून तत्काल वापस ले केंद्र’

Ranchi: झारखंड विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पारित ‘खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इस संशोधन को राज्यों के संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए केंद्र सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।

प्रदीप यादव ने कहा कि खनिज संसाधनों पर राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास सहकारी संघवाद और राज्यों की आर्थिक स्वायत्तता के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि इस संशोधन का झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्य पर व्यापक असर पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर केंद्र पर निशाना

प्रदीप यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ के फैसले के बाद राज्यों को खनिज संसाधनों पर अतिरिक्त सेस लगाने का अधिकार मिला था। उनके मुताबिक, केंद्र सरकार का नया संशोधन इसी अधिकार को सीमित करने की कोशिश है।

उन्होंने कहा कि झारखंड की अर्थव्यवस्था में खनिज संसाधनों की बड़ी भूमिका है। ऐसे में खनिज से जुड़े राजस्व और राज्यों के अधिकारों में किसी भी तरह की कटौती का सीधा असर राज्य के विकास कार्यों और आर्थिक संसाधनों पर पड़ सकता है।

‘राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश’

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों की आर्थिक स्वायत्तता को कमजोर कर उन्हें केंद्र पर अधिक निर्भर बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से मिलने वाला राजस्व झारखंड जैसे राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इससे जुड़ा कोई भी फैसला राज्य के हितों को ध्यान में रखकर होना चाहिए।

उन्होंने इसे राज्यों के अधिकार और वित्तीय संघीय ढांचे का मुद्दा बताते हुए कहा कि इस पर राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर चर्चा होनी चाहिए।

मंईयां सम्मान योजना पर भी असर का दावा

प्रदीप यादव ने कहा कि झारखंड में गरीबों, महिलाओं, किसानों और जरूरतमंदों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि खनिज राजस्व से जुड़े अधिकार कमजोर होने पर राज्य की वित्तीय क्षमता प्रभावित हो सकती है और इसका असर कल्याणकारी योजनाओं पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने विशेष रूप से मंईयां सम्मान योजना का जिक्र करते हुए कहा कि यह विषय लाखों महिलाओं के सामाजिक सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा है।

‘जल, जंगल, जमीन और खनिज पर अधिकार की लड़ाई जारी रहेगी’

प्रदीप यादव ने कहा कि कांग्रेस ने संसद में इस विधेयक का विरोध किया है और झारखंड में भी पार्टी राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी।

उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राज्यों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करे और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर पुनर्विचार करे।

कांग्रेस विधायक दल के नेता ने कहा कि झारखंड के जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा पर राज्य के अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button