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बिहार विधान परिषद चुनाव में निशांत कुमार और दीपक प्रकाश की एंट्री तय

पिता नीतीश कुमार की राह पर निशांत, जल्द बन सकते हैं MLC

निशांत कुमार बनेंगे MLC! मंत्री बनने के बाद विधान परिषद भेजने की तैयारी, दीपक प्रकाश का नाम भी तय

बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक समीकरण बनता दिख रहा है। मुख्यमंत्री रह चुके नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अब अपने पिता की तरह विधान परिषद के रास्ते राजनीति में मजबूत एंट्री कर सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री बने निशांत कुमार को जल्द ही बिहार विधान परिषद भेजा जा सकता है। वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) नेता उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का भी MLC बनना लगभग तय माना जा रहा है।

10 सीटों पर जल्द हो सकता है चुनाव

बिहार विधान परिषद की 10 सीटें जल्द खाली होने वाली हैं। चुनाव आयोग मई के आखिरी सप्ताह में चुनाव की घोषणा कर सकता है।

28 जून को कुल 9 सीटों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इनमें जेडीयू, भाजपा, राजद और कांग्रेस के कई नेताओं की सीटें शामिल हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार NDA इस बार संगठन और नई पीढ़ी के नेताओं को विधान परिषद भेजने की रणनीति पर काम कर रहा है।

2 महीने में राजनीति से मंत्री तक का सफर

निशांत कुमार ने 8 मार्च 2026 को जेडीयू की सदस्यता ली थी। महज दो महीने के भीतर उन्हें सम्राट सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बना दिया गया।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके निशांत लंबे समय तक राजनीति से दूरी बनाए हुए थे, लेकिन हाल के दिनों में वे लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों और सद्भावना यात्रा के जरिए सक्रिय नजर आ रहे हैं।

JDU के भीतर उन्हें भविष्य के बड़े चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है।

दीपक प्रकाश भी जाएंगे विधान परिषद

RLM नेता दीपक प्रकाश फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मंत्री बनाया गया है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर रह चुके दीपक प्रकाश ने विदेश से पढ़ाई के बाद सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। वे उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं और NDA के युवा चेहरों में गिने जा रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि NDA उन्हें भी विधान परिषद भेजने की तैयारी कर चुका है।

NDA में सीट बंटवारे पर मंथन

विधान परिषद चुनाव को लेकर NDA में सीट बंटवारे पर भी चर्चा तेज हो गई है। जेडीयू और भाजपा के अलावा एक सीट चिराग पासवान की पार्टी LJP (रामविलास) को भी मिल सकती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ विधान परिषद की सीटों का नहीं, बल्कि बिहार में नई राजनीतिक पीढ़ी को स्थापित करने की तैयारी भी है।

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