कोलकाता/सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच राजनैतिक तापमान चरम पर पहुँच गया है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने सीधे तौर पर राष्ट्रपति पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राष्ट्रपति कार्यालय का इस्तेमाल बंगाल सरकार की छवि बिगाड़ने के लिए कर रही है। शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे के दौरान उपजे विवाद ने अब केंद्र और राज्य के बीच एक बड़े गतिरोध का रूप ले लिया है।
विवाद की मुख्य वजह: प्रोटोकॉल और कार्यक्रम स्थल: Mamata Banerjee
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब राष्ट्रपति मुर्मू सिलीगुड़ी के पास एक आदिवासी सम्मेलन में शामिल होने पहुँचीं। वहां उन्होंने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर की कि उनके स्वागत के लिए न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आईं और न ही कोई कैबिनेट मंत्री मौजूद था। राष्ट्रपति ने कहा:
“ममता दीदी मेरी छोटी बहन जैसी हैं, पता नहीं वह क्यों नाराज हैं। यह आमतौर पर देखा जाता है कि जब राष्ट्रपति आते हैं, तो मुख्यमंत्री और मंत्री मौजूद रहते हैं।”
इसके अलावा, राष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल को बिधाननगर से गोशाईपुर शिफ्ट किए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जानबूझकर ऐसी जगह चुनी जहाँ आदिवासियों का पहुँचना मुश्किल था, ताकि कार्यक्रम सफल न हो सके।
“मैडम, आप भाजपा के जाल में फँस गई हैं”: Mamata Banerjee
कोलकाता में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के खिलाफ धरने पर बैठीं ममता बनर्जी ने इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:
-
चुनावी राजनीति का आरोप: ममता ने कहा कि चुनाव के समय राष्ट्रपति का आना और राज्य के विकास पर सवाल उठाना शुद्ध रूप से राजनीति है।
-
सीधा हमला: उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए कहा, “मैडम, आप भाजपा के जाल में फँस गई हैं। अगर आप साल में एक बार आतीं तो मैं खुद स्वागत करती, लेकिन चुनाव के दौरान मेरे लिए लोगों के अधिकारों की लड़ाई छोड़ना संभव नहीं है।”
-
आदिवासी कार्ड: मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति से सवाल किया कि जब मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ या मणिपुर में आदिवासियों पर अत्याचार होता है, तब वह चुप क्यों रहती हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के इशारे पर केवल बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा का हमला
इस विवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हस्तक्षेप किया। उन्होंने इसे “शर्मनाक और अभूतपूर्व” करार देते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रपति के अपमान की सारी हदें पार कर दी हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह न केवल संवैधानिक गरिमा का उल्लंघन है, बल्कि देश के आदिवासी समुदाय का भी अपमान है।
