झारखंड ट्रेजरी घोटाले में बड़ा खुलासा, SP ऑफिस तक पहुंची जांच की आंच

झारखंड में बड़ा वित्तीय घोटाला! अब पुलिस महकमे तक पहुंची जांच

झारखंड ट्रेजरी घोटाले में बड़ा खुलासा! अब SP ऑफिस तक पहुंची जांच, कई जिलों में संदिग्ध ट्रांजैक्शन

झारखंड में कथित राजकोष घोटाले की जांच अब नए और बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। अब तक बाबुओं और वित्तीय गड़बड़ियों तक सीमित माने जा रहे इस मामले में अब पुलिस विभाग के कई बड़े अधिकारियों के नाम भी जांच के दायरे में आने लगे हैं।

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) अब इस बात की जांच कर रही है कि आखिर ट्रेजरी से निकाला गया सरकारी पैसा विभिन्न जिलों के SP ऑफिस से जुड़े खातों तक कैसे पहुंचा।

SIT को मिले कई जिलों में संदिग्ध ट्रांजैक्शन के संकेत

उत्पाद सचिव अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित SIT ने जांच के दौरान कई अहम वित्तीय दस्तावेज खंगालने शुरू कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार शुरुआती जांच में बोकारो और जमशेदपुर समेत कम से कम पांच जिलों में ऐसे संकेत मिले हैं, जहां DDO खातों से SP ऑफिस से जुड़े खातों तक रकम ट्रांसफर हुई।

बताया जा रहा है कि मामला सिर्फ पांच जिलों तक सीमित नहीं है और करीब 14 जिलों में इसी तरह की गड़बड़ियों की आशंका जताई जा रही है।

फर्जी भुगतान और टेम्पररी ID से निकासी का शक

जांच एजेंसियों को आशंका है कि ट्रेजरी से पैसे निकालने के लिए फर्जी भुगतान आदेश और टेम्पररी ID का इस्तेमाल किया गया।

SIT अब बैंक खातों में हुए संदिग्ध ट्रांजैक्शनों की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सरकारी खजाने का पैसा किन-किन रास्तों से होकर कहां पहुंचा।

पुलिस मैनुअल और वित्तीय नियमों के उल्लंघन की आशंका

जांच में ऐसे संकेत भी मिले हैं कि पूरे मामले में सिर्फ वित्तीय नियमों का ही नहीं बल्कि पुलिस मैनुअल का भी उल्लंघन हुआ हो सकता है।

SIT अब विभिन्न जिलों से विपत्र (बिल) और विपत्र पंजी की कॉपियों का मिलान कर रही है, ताकि हर भुगतान और निकासी की पूरी श्रृंखला समझी जा सके।

बोकारो के बाद हजारीबाग समेत अन्य जिलों में जांच

सूत्रों के मुताबिक SIT अब हजारीबाग समेत अन्य जिलों का भी दौरा करेगी। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए PAG (Principal Accountant General) ऑफिस ने भी विशेष ऑडिट की तैयारी शुरू कर दी है।

इसके तहत बोकारो, हजारीबाग और अन्य जिलों के SP ऑफिस का स्पेशल ऑडिट कराया जाएगा।

बड़ा सवाल: लापरवाही या संगठित नेटवर्क?

अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ सरकारी प्रक्रिया में लापरवाही थी या फिर ट्रेजरी सिस्टम के भीतर कोई बड़ा संगठित नेटवर्क सक्रिय था।

अगर SIT की जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला झारखंड के सबसे बड़े प्रशासनिक और वित्तीय घोटालों में शामिल हो सकता है।

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