Dhanbad: नौकरी छोड़ बनाई पहचान, धनबाद के अशोक मंडल की नर्सरी बनी मिसाल

200 से ज्यादा पौधे, बिना सरकारी मदद, अशोक मंडल की सफलता की कहानी

Dhanbad: Dhanbad जिले के धोकरा गांव के रहने वाले अशोक मंडल आज उन युवाओं के लिए मिसाल बन चुके हैं, जो नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं। उन्होंने ‘नौकरी’ के बजाय ‘रोजगार देने’ का रास्ता चुना और आज उनकी नर्सरी पूरे झारखंड में पहचान बना चुकी है।

संघर्ष से खड़ी की पहचान: Dhanbad

अशोक मंडल ने अपने करियर की शुरुआत छोटे-मोटे कामों से की, लेकिन मन में हमेशा एक सवाल रहा “दूसरों के लिए कब तक काम करेंगे?” इसी सोच ने उन्हें खेती और नर्सरी की ओर मोड़ दिया। छोटी शुरुआत से शुरू हुआ सफर आज एक बड़े व्यवसाय में बदल चुका है।

200 से ज्यादा पौधों की दुनिया: Dhanbad

उनकी नर्सरी आज किसी गार्डन से कम नहीं है। यहां

मिलती हैं। 200 से ज्यादा प्रजातियों वाले इस नर्सरी की मांग अब सिर्फ धनबाद तक सीमित नहीं, बल्कि गिरिडीह, पाकुड़ और गोड्डा जैसे जिलों तक फैल चुकी है।

बिना सरकारी मदद के सफलता: Dhanbad

सबसे खास बात यह है कि इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद उन्हें अब तक सरकारी स्तर पर कोई खास सहायता या सब्सिडी नहीं मिली। अशोक मंडल का कहना है कि वे आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

चुनौतियां जो आज भी कायम

युवाओं के लिए प्रेरणा

अशोक मंडल की कहानी बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ा काम किया जा सकता है। उनकी नर्सरी आज स्थानीय युवाओं के लिए एक सीख बन चुकी है कि स्वरोजगार ही असली ताकत है।

अब नजर प्रशासन पर

अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन ऐसे मेहनती उद्यमियों की मदद करेगा? क्या अशोक मंडल को सोलर पंप और जरूरी सुविधाएं मिलेंगी? फिलहाल, धोकरा की यह नर्सरी झारखंड के कृषि नक्शे पर अपनी अलग पहचान बना चुकी है और एक संदेश दे रही है:
“मिट्टी से जुड़ो, भविष्य खुद चमकेगा।

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