चुनाव खत्म होते ही बढ़ी महंगाई की मार, पेट्रोल-डीजल से लेकर दूध और सोना तक महंगा
देश में पांच राज्यों के चुनाव खत्म होने और नई सरकारों के गठन के बाद अब महंगाई को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। पिछले तीन दिनों में पेट्रोल-डीजल, CNG, दूध और सोने की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम आदमी की जेब पर सीधा असर डाला है। मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के सामने घरेलू बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
तीन दिनों में कई जरूरी चीजें हुईं महंगी
बीते दिनों सोने की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। इसके बाद दूध कंपनियों ने भी प्रति लीटर दाम बढ़ा दिए। शुक्रवार को पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में वृद्धि ने आम लोगों की परेशानी और बढ़ा दी।
इसके साथ ही भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर आने वाले दिनों में आयातित वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ेगा।
कच्चे तेल की कीमतों का असर
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
तेल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
हर सेक्टर पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के मुताबिक, ईंधन महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। देश में अधिकतर माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है। ऐसे में ट्रांसपोर्ट महंगा होने पर सब्जी, अनाज, दूध, दवाइयों और रोजमर्रा की अन्य वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
दवा उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि कई जरूरी दवाओं के कच्चे माल की कीमतों में भी तेजी आई है। इससे मेडिकल खर्च बढ़ने की संभावना है।
सरकार की सलाहों पर भी उठ रहे सवाल
बढ़ती महंगाई के बीच लोगों को ईंधन की बचत, कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और वर्क फ्रॉम होम अपनाने जैसी सलाहें दी जा रही हैं। हालांकि विपक्ष और आम लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर आर्थिक हालात पहले से खराब थे तो चुनाव के दौरान इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।
सोशल मीडिया पर भी लोग लगातार बढ़ती कीमतों और जीवनयापन के बढ़ते खर्च को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

