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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया के जरिए सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो को श्रद्धांजलि दी

Hul Diwas 2026 अबुआ सरकार वीर पुरखों के सपनों का झारखंड बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

हूल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए संताल हूल के अमर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, वीरांगना फूलो-झानो सहित सभी वीर शहीदों को शत-शत नमन करते हुए “हूल जोहार” कहा। मुख्यमंत्री ने शहीदों के माता-पिता चुन्नी मांझी और सुबी हांसदा को भी श्रद्धापूर्वक नमन किया।

1855 की हूल क्रांति को किया याद

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि 30 जून 1855 को भोगनाडीह की धरती से उठी हूल की हुंकार ने अंग्रेजी हुकूमत और शोषणकारी व्यवस्था को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि झारखंड के वीर पुरखों ने जल, जंगल, जमीन, भाषा, संस्कृति और अस्मिता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, लेकिन अन्याय के सामने कभी झुके नहीं।

वीर पुरखों का संघर्ष हमारी पहचान

हेमंत सोरेन ने कहा कि हूल क्रांति के महानायकों का संघर्ष झारखंड की असली पहचान है। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और राज्य के हर नागरिक को उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।

‘अबुआ सरकार’ सपनों को करेगी साकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर नई ऊर्जा और नए संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि अबुआ सरकार वीर शहीदों के सपनों का झारखंड बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता और ईमानदारी से कार्य कर रही है।

हूल जोहार, जोहार झारखंड, जय झारखंड

अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को हूल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए “हूल जोहार”, “जोहार झारखंड” और “जय झारखंड” का उद्घोष किया।

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