हजारीबाग/रांची | 19 अप्रैल 2026: नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर झारखंड की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। हजारीबाग में आयोजित प्रेस वार्ता में BJP प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि हर अच्छे काम का विरोध करना, षड्यंत्र और राजनीति करना कांग्रेस का पुराना इतिहास रहा है, और महिला आरक्षण का यह विधेयक भी उसी राजनीति का शिकार हो गया।
“विपक्ष ने किया जघन्य पाप, महिलाएं नहीं करेंगी माफ”: BJP
आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, झामुमो और राजद ने इस बिल का विरोध कर अपना असली चेहरा देश की महिलाओं के सामने ला दिया है। उन्होंने कहा कि यह “राजनीतिक अपराध” है, जिसे महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को 33% आरक्षण देने के उद्देश्य से यह ऐतिहासिक पहल की, ताकि राजनीति में उनकी भागीदारी बढ़ सके। लेकिन विपक्ष ने इसे भी राजनीति का मुद्दा बना दिया।
“25 अप्रैल को रांची में विशाल पदयात्रा”: BJP
भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया है। आदित्य साहू ने बताया कि 25 अप्रैल को रांची के मोराबादी मैदान से सुबह 11 बजे विशाल पदयात्रा निकाली जाएगी, जिसमें हजारों महिलाएं शामिल होंगी। इसके बाद 25 से 30 अप्रैल तक झारखंड के सभी 595 मंडलों में पदयात्रा और कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के पुतला दहन का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। पार्टी का दावा है कि यह आंदोलन गांव-गांव तक पहुंचेगा और महिलाओं के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
“झारखंड में महिलाओं की स्थिति चिंताजनक”: BJP
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि झारखंड में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति खराब है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते वर्षों में दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ी हैं और सरकार इन्हें रोकने में विफल रही है।
“कांग्रेस के लिए नारी शक्ति परिवार तक सीमित”
वहीं, कोडरमा विधायक नीरा यादव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके लिए “नारी शक्ति” कुछ खास परिवारों तक सीमित है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल नारेबाजी करती है, लेकिन जब महिलाओं को वास्तविक अधिकार देने की बात आती है तो पीछे हट जाती है। नीरा यादव ने महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि वे राजनीतिक अधिकारों से वंचित करने वाले दलों को समय आने पर सबक सिखाएं।
महिला आरक्षण को लेकर झारखंड में राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। भाजपा जहां इसे महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक उबाल ला सकता है।
