पटना/गोपालगंज | Bihar के गोपालगंज जिले की ऐतिहासिक सासामुसा चीनी मिल के दिन अब बहुरने वाले हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की व्यक्तिगत रुचि और पहल के बाद, पांच वर्षों से बंद पड़ी इस मिल को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
इस फैसले से न केवल हजारों गन्ना किसानों की आर्थिक आस जगी है, बल्कि स्थानीय बाजार की रौनक लौटने की भी उम्मीद है।
Bihar News:1935 से आजीविका का आधार रही यह मिल
सासामुसा चीनी मिल की स्थापना साल 1935 में हुई थी। दशकों तक यह कटेया, पंचदेवरी, कुचायकोट और ऊंचकागांव जैसे प्रखंडों के गन्ना किसानों की आजीविका का मुख्य केंद्र बनी रही।
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रोजगार का स्रोत: मिल न केवल गन्ना नकदी फसल का बाजार थी, बल्कि सैकड़ों मजदूरों और कर्मचारियों के घरों का चूल्हा इसी से जलता था।
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बंद होने से बढ़ा संकट: पांच साल पहले भारी घाटे के कारण मिल पर ताला लग गया, जिससे मजदूर बेरोजगार हो गए और किसानों का बकाया फंस गया। इसके बाद से ही किसान और कर्मचारी मिल चालू कराने के लिए लगातार आंदोलन कर रहे थे।
Bihar News: मुख्यमंत्री का एक्शन और कर्नाटक की कंपनी से समझौता
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किसानों के दर्द को समझते हुए वरीय अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।
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प्राथमिकता पर कार्य: मुख्यमंत्री ने गन्ना उद्योग विभाग को मिल को प्राथमिकता के आधार पर चालू करने का आदेश दिया।
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निरानी ग्रुप की एंट्री: राज्य सरकार के प्रयासों के बाद कर्नाटक की प्रतिष्ठित निरानी ग्रुप ने सासामुसा चीनी मिल को संचालित करने की सहमति दे दी है। इससे नीलामी के कगार पर खड़ी इस मिल के बचने का रास्ता साफ हो गया है।
Bihar Sarkar: किसानों और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
खेम मटिहनिया गांव के किसान ज्ञानचंद प्रसाद कुशवाहा जैसे सैकड़ों किसानों के चेहरे पर आज मुस्कान है। किसानों का कहना है कि मिल चालू होने से उन्हें अपना गन्ना बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और समय पर भुगतान मिल सकेगा। गन्ना उद्योग विभाग के जनसेवक अखिलेश्वर कुमार प्रसाद के अनुसार, मिल चलने से केवल किसान ही नहीं, बल्कि स्थानीय बाजारों और छोटे व्यापारियों की अर्थव्यवस्था में भी नई जान आएगी।
“पुराना गौरव लौटाएगी सरकार”
पटना में आयोजित राज्य स्तरीय गन्ना किसान संगोष्ठी में गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सासामुसा सहित अन्य बंद मिलों को खोलने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति सक्रियता से काम कर रही है। अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार ने भी बिहार के चीनी उत्पादन के खोए हुए गौरव को वापस लाने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।

