पटना | बिहार की नीतीश सरकार में ग्रामीण कार्य मंत्री Ashok Choudhary अब एक नई भूमिका में नजर आएंगे। नाम को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के सुलझने के बाद, उन्हें पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले पटना के प्रतिष्ठित एएन कॉलेज में ‘असिस्टेंट प्रोफेसर’ (सहायक प्राध्यापक) के पद पर नियुक्त किया गया है।
कुलपति ने कराई जॉइनिंग
सोमवार को पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर उपेंद्र प्रसाद सिंह और कुलसचिव अबू बकर रिजवी ने मंत्री अशोक चौधरी को नियुक्ति पत्र सौंपा। इस अवसर पर मगध विश्वविद्यालय के कुलपति शशि प्रताप शाही भी मौजूद रहे। जॉइनिंग के बाद मंत्री ने इसे अपने लिए ‘गौरव का क्षण’ बताया और कहा कि वे राजनीति विज्ञान (Political Science) के छात्रों को अपनी सेवाएं देने के लिए उत्साहित हैं।
Ashok Choudhary: क्या था नाम का विवाद?
अशोक चौधरी की नियुक्ति पिछले कुछ समय से तकनीकी कारणों से अटकी हुई थी:
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नाम में अंतर: विवाद इस बात पर था कि उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्रों (Certificates) में उनका नाम ‘अशोक कुमार’ दर्ज है, जबकि चुनावी हलफनामे और सार्वजनिक जीवन में वे ‘अशोक चौधरी’ नाम का उपयोग करते हैं।
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क्लीन चिट: शिक्षा विभाग ने इस मामले को होल्ड पर रखकर बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग से मंतव्य मांगा था। आयोग से हरी झंडी मिलने के बाद विभाग ने उनकी नियुक्ति का रास्ता साफ किया।
5 साल का लंबा इंतजार
यह नियुक्ति साल 2020 में निकाली गई बहाली प्रक्रिया का हिस्सा है:
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आवेदन: आयोग ने 2020 में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती निकाली थी, जिसमें अशोक चौधरी ने भी आवेदन किया था।
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परिणाम: साक्षात्कार के बाद 2025 में परिणाम घोषित हुआ, जिसमें चयनित 274 उम्मीदवारों में मंत्री का नाम भी शामिल था।
Ashok Choudhary: राजनीति से शिक्षा तक
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प्रोफाइल: 58 वर्षीय अशोक चौधरी पीएचडी धारक हैं और वर्तमान में बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं।
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राजनीतिक सफर: उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे), लेकिन बाद में वे जेडीयू में शामिल हो गए और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद भरोसेमंद सिपहसालार माने जाते हैं।
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पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनकी बेटी शांभवी चौधरी समस्तीपुर से सांसद हैं और देश की सबसे युवा सांसदों में से एक हैं।
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