बंगाल चुनाव के बाद बिहार में कैबिनेट विस्तार, नए चेहरों की एंट्री और कुछ मंत्रियों की छुट्टी के संकेत
पटना: बिहार की नई सरकार के गठन के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा कैबिनेट विस्तार को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है और माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की व्यस्तता खत्म होते ही मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जल्द ही अपनी टीम का विस्तार करेंगे। फिलहाल सरकार का कामकाज सीमित मंत्रियों के साथ चल रहा है, जिसमें उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और वरिष्ठ नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव अहम भूमिका निभा रहे हैं।
36 मंत्रियों की सीमा, संतुलन सबसे बड़ी चुनौती
संवैधानिक नियमों के तहत बिहार में अधिकतम 36 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं। ऐसे में जातीय, क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन साधना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। माना जा रहा है कि विस्तार में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही नाम तय किए जाएंगे।
पुराने चेहरों पर गाज, नए को मौका
जानकारी के अनुसार, कुछ मौजूदा मंत्रियों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा है, ऐसे में उनकी छुट्टी तय मानी जा रही है। वहीं, कुछ नए चेहरों को मौका देकर सरकार जनता के बीच सकारात्मक संदेश देने की तैयारी में है।
भाजपा का बढ़ सकता है प्रभाव
इस बार मंत्रिमंडल में भारतीय जनता पार्टी की हिस्सेदारी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। विस्तार के बाद कई अहम विभागों का बंटवारा सहयोगी दलों और भाजपा नेताओं के बीच किया जा सकता है, जिससे सत्ता समीकरण बदल सकते हैं।
सहयोगी दलों की भी अहम भूमिका
कैबिनेट विस्तार में सहयोगी दलों की पसंद भी अहम रहेगी। उपेंद्र कुशवाहा अपने कोटे को लेकर फैसला करेंगे, वहीं चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) से कौन मंत्री बनेगा, इस पर अंतिम निर्णय उन्हीं का होगा।
जल्द हो सकता है बड़ा फैसला
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल चुनाव के बाद बिहार में कैबिनेट विस्तार तेजी से होगा और इसके साथ ही सरकार की दिशा और प्राथमिकताएं भी स्पष्ट हो जाएंगी। आने वाले दिनों में कई नए चेहरे और बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं।
