झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026: बैजनाथ राम और परिमल नाथवानी विजयी, कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को झटका
Ranchi: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने जीत दर्ज कर ली है, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणाम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, खासकर क्रॉस वोटिंग को लेकर।
राज्यसभा चुनाव में कुल 81 विधायकों ने मतदान किया था। मतगणना के बाद सामने आए परिणामों में बैजनाथ राम को 30 वोट, परिमल नाथवानी को 28 वोट और कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 20 वोट मिले। चुनाव नतीजों ने सत्तारूढ़ महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिमल नाथवानी ने रचा नया रिकॉर्ड
इस जीत के साथ परिमल नाथवानी चौथी बार राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे हैं। झारखंड की राजनीति में उनका प्रभाव एक बार फिर साबित हुआ है। इससे पहले वे झारखंड और आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। एनडीए के समर्थन के साथ उनकी वापसी को राजनीतिक रणनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
बैजनाथ राम की जीत का राजनीतिक संदेश
झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले बैजनाथ राम की जीत के जरिए झामुमो ने दलित समाज को मजबूत संदेश देने की कोशिश की है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इसे महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम माना जा रहा है।
कांग्रेस को लगा बड़ा झटका
कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार ने पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव से पहले कांग्रेस ने जीत का दावा किया था, लेकिन परिणाम उम्मीदों के विपरीत रहे। राजनीतिक गलियारों में क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज हो गई है।
क्रॉस वोटिंग बनी चर्चा का विषय
राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद सबसे ज्यादा चर्चा क्रॉस वोटिंग को लेकर हो रही है। महागठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार की हार ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। माना जा रहा है कि कुछ विधायकों के मतदान ने चुनावी गणित बदल दिया।
आगामी राजनीति पर असर
राज्यसभा चुनाव के ये नतीजे झारखंड की आगामी राजनीति पर असर डाल सकते हैं। एक ओर एनडीए खेमे में उत्साह का माहौल है, वहीं कांग्रेस और महागठबंधन को आत्ममंथन करना पड़ सकता है। आने वाले विधानसभा चुनावों में सीट बंटवारे और राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
