
Assam News : बिस्वनाथ चारियाली: झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने Assam के बिस्वनाथ चारियाली स्थित मेजिकाजन चाय बागान में आयोजित एक विशाल जागरूकता जनसभा को संबोधित करते हुए असम के आदिवासी समुदाय के अस्तित्व और पहचान की रक्षा के लिए हुंकार भरी।
मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM ने कहा असम के आदिवासी समुदाय को उनका हक-अधिकार मिले। असम में निवास कर रहे आदिवासी समुदाय देश के चाय व्यापार का अभिन्न अंग हैं। आदिवासी समुदाय को अपना अस्तित्व और पहचान की संरक्षा के लिए एकजुट रहने की आवश्यकता है। https://t.co/h2sgQw3SqQ pic.twitter.com/j86TXgWGNb
— Office of Chief Minister, Jharkhand (@JharkhandCMO) March 10, 2026
आदिवासी स्टूडेंट यूनियन ऑफ असम, जारी शक्ति एवं आदिवासी काउंसिल ऑफ असम द्वारा आयोजित इस सभा में मुख्यमंत्री ने आदिवासियों को उनका संवैधानिक हक दिलाने के लिए हर संभव कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ने का संकल्प दोहराया।
चाय उद्योग की रीढ़ हैं आदिवासी, फिर भी शोषण का शिकार: Assam News
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि असम के आदिवासी समुदाय के लोग सदियों से देश के चाय व्यापार का अभिन्न अंग रहे हैं। उन्होंने बड़े ही भावुक शब्दों में कहा:
“असम का चाय उद्योग आपके पसीने और मेहनत के बूते चल रहा है, लेकिन बदले में आपको क्या मिलता है, यह किसी से छिपा नहीं है। यहाँ के गरीब-गुरबा, आदिवासी और पिछड़ों पर लंबे समय से हो रहे अत्याचार और शोषण की गूँज अब दूर तक सुनाई दे रही है।”
उन्होंने क्रांतिकारी नेता प्रदीप नाग के बलिदान को याद करते हुए कहा कि हक की लड़ाई में महापुरुषों ने अपने प्राणों की आहुति दी है, जिसे व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा।
“पहली पंक्ति शहीद होगी, तीसरी राज्य संवारेगी”: Assam News
मुख्यमंत्री ने झारखंड अलग राज्य के आंदोलन का उदाहरण देते हुए आदिवासियों को प्रेरित किया। उन्होंने दिशोम गुरु शिबू सोरेन और शहीद शक्ति नाथ महतो के संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा:
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ऐतिहासिक संघर्ष: झारखंड 50 वर्षों के कड़े संघर्ष के बाद बना।
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बलिदान की सीख: शक्ति नाथ महतो ने कहा था कि इस लड़ाई में पहली पंक्ति के लोग मारे जाएंगे, दूसरी पंक्ति के लोग जेल जाएंगे और तीसरी पंक्ति के लोग राज्य को संवारेंगे। असम के आदिवासियों को भी इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा।
संवैधानिक अधिकार और ‘परिवर्तन’ की राह
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम में आदिवासियों को ST (अनुसूचित जनजाति) का दर्जा न मिलने पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा:
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एक छत, एक छांव: असम के आदिवासियों को अब एक मंच पर आना होगा। बौद्धिक और सामाजिक रूप से मजबूत हुए बिना बदलाव संभव नहीं है।
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कानूनी लड़ाई: आदिवासियों को संविधान में प्रदत्त अधिकारों के लिए अब कानूनी लड़ाई लड़नी होगी। जरूरत पड़ी तो हम संविधान पीठ का दरवाजा खटखटाएंगे।
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साजिश से सावधान: देश में कुछ ऐसी शक्तियां हैं जो आदिवासियों को केवल ‘मजदूर’ बनाकर रखना चाहती हैं। हमें अपनी पहचान और जल-जंगल-जमीन को बचाने के लिए जागरूक रहना होगा।
सामाजिक सौहार्द: नापोम जरोनी में इफ्तार
जनसभा के बाद मुख्यमंत्री तेजपुर के निकट नापोम जरोनी पहुंचे, जहाँ उन्होंने आयोजित इफ्तार पार्टी में शिरकत की। यहाँ उन्होंने विभिन्न समुदायों के लोगों के साथ मिल-बैठकर आपसी भाईचारे और देश की अखंडता का संदेश दिया।



